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बजरंग रामलीला समिति सारीपुर में चल रहे रामलीला में कलाकारों द्वारा लंका दहन व विभीषण शरणागति की लीला का किया मंचन
BHADOHI NEWS: श्री बजरंग रामलीला समिति सारीपुर में चल रहे रामलीला में कलाकारों द्वारा लंका दहन व विभीषण शरणागति की लीला का मंचन किया गया। लीला को देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
इस दौरान बजरंगबली माता सीता के पास पहुंचते हैं। माता सीता के सामने भगवान श्रीराम की मुद्रिका को गिराते हैं। मुदरी को देखकर माता सीता विचार करने लगती है कि प्रभु को मार कर लाना असंभव है और माया से भी ऐसा रचा नहीं जा सकता। तब बजरंगबली माता सीता के सामने प्रकट होकर सारा हाल बताते हैं। फिर बजरंगबली को भूख लगने पर वह पेड़ों से फल खाते हैं और पेड़ों को तोड़ कर फेंक देते हैं। रखवाली करने वाले राक्षसों को मारते हैं। यह खबर जब रावण पता होता है तो वह अक्षय कुमार को भेजता है। बजरंगबली उसका वध कर देते हैं। फिर वह मेघनाथ को भेजता है। मेघनाथ बजरंगबली को बांधकर रावण के पास ले आता हैं। बजरंगबली रावण को हर तरह से समझाते हैं। लेकिन वह नहीं समझता और उनके पूछ में आग लगवा देता है। इस पर सारी लंका नगरी को बजरंगबली जला देते हैं और पुनः प्रभु के पास आ जाते हैं। रावण अपने मंत्रियों से सलाह लेता है। इस पर विभीषण कहते हैं कि सीता मां को लौटा कर श्रीराम की शरण में चलना चाहिए। जिसपर वह विभीषण को भरी सभा में लात लगाता है। विभीषण दुखी होकर श्रीराम के शरण में चले जाते हैं। भगवान राम पूछते हैं कि इस सागर को कैसे पार किया जाए तो वह समुद्र के पास जाते हैं और उनसे विनती करते हैं। जब समुद्र नहीं मानता है तो वह उसको धनुष बाण द्वारा सुखाने की बात करते हैं। समुद्र त्राहिमाम करता हुआ बाहर निकलता है और बताता है कि नल नील वरदानी है। वह राम राम लिखेंगे तो पत्थर भी पानी पर तैर जाएंगे। भगवान राम शांति दूत के रूप में अंगद जी को रावण की सभा में भेजते हैं। इसी पर लीला का समापन हो जाता है. इस मौके पर पीयूष, टीकू, आनंद पाठक, अशोक पांडेय, विनय पाठक, कृपाशंकर पाठक, प्रेम पाठक, राज विश्वकर्मा, श्यामधर पाठक, सुनील पाठक, अजय कुमार दुबे, भाईजी दुबे, विनय पांडेय, शमशेर बहादुर यादव, अजीत यादव, किशन, सुरेश पाठक, सुनील जायसवाल, अभय कुमार पाठक, सुरेश कुमार दुबे, ओमप्रकाश, भुवाल विश्वकर्मा व सुरेंद्र मौर्य आदि लीला को सफल बनाने में लगे रहे।