कृष्ण-रुक्मिणी विवाह व रासलीला देख झूमे श्रोता

KAUSHAMBI NEWS: नगर पंचायत दारानगर कड़ा धाम क्षेत्र के दारानगर कस्बे में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास स्वामि पुंडरीकाक्षाचार्य वेदांती जी महाराज ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा में रासलीला से रुक्मिणी मंगल तक की कथा में रासलीला में भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात को गोपियों के साथ दिव्य महारास रचाया था। इसके बाद रुक्मिणी मंगल की कथा आती है, जिसमें विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी का भगवान श्रीकृष्ण के साथ विवाह का वर्णन है। रुक्मिणी, देवी लक्ष्मी का अवतार थीं, जो बाल्यकाल से ही श्रीकृष्ण से प्रेम करती थीं और उन्होंने अपने भाई के विरोध के बावजूद श्रीकृष्ण से विवाह किया।कथा के छठें दिन स्वामि पुंडरीकाक्षाचार्य वेदांती जी महाराज ने रास लीला का वर्णन किया।उन्होंने रास लीला को जीव और ईश्वर का विशुद्ध मिलन बताया। उनके अनुसार, भगवान कृष्ण ने यमुना तट पर योग माया से असंख्य गोपियों के साथ महारास किया। ये गोपियां साधन सिद्धा, योग सिद्धा और वरदान सिद्धा थीं। कुछ त्रृचा रूपा और कुछ ऋषि रूपा थीं।कथावाचक ने कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग में बताया कि रुक्मिणी लक्ष्मी का और कृष्ण नारायण का स्वरूप हैं। उन्होंने भगवान कृष्ण के 16,108 विवाहों का आध्यात्मिक महत्व समझाया। आठ प्रकार की प्रकृति को अष्ट पटरानी के रूप में बताया। वेद के सोलह हजार मंत्रों को सोलह हजार पत्नियों और सौ उपनिषदों को सौ रानियों के रूप में वर्णित किया।कथावाचक ने कहा कि महारास लीला का श्रवण करने से हृदय से काम वासना नष्ट होती है ।श्रोताओं ने भक्तिभाव से कथा का श्रवण किया।कथा में डीजीसी क्रिमिनल सोमेश्वर कुमार तिवारी, शिक्षक पवन कुमार तिवारी, भुनेश्वर कुमार तिवारी, वेद प्रकाश, हरगोविंद यादव, दीपा श्रीवास्तव, सुलभ मिश्र, एडवोकेट लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, शशि कमल मिश्र, मनीष पाठक, मूल प्रकाश त्रिपाठी, जय मणि तिवारी, सुनील अवस्थी, राज मणि तिवारी, दीपक मणि, शिवम तिवारी, प्रतिभा, आशीष विश्वकर्मा,संजय पाठक, विपुल मिश्र, राजेश त्रिपाठी, नितेश त्रिपाठी सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।

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