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जनता बोली— विकास का मतलब जनता की सुविधा होनी चाहिए, न कि उसकी परेशानी
SIDHARTHNAGAR NEWS: रेलवे स्टेशन बढ़नी पर बने वॉशिंग कोचिंग डिपो ने नगरवासियों की दिनचर्या को अस्त-व्यस्त कर दिया है। विकास के नाम पर जनता को राहत नहीं, बल्कि रोज़ाना जाम की त्रासदी मिल रही है। रेलवे क्रॉसिंग पर घंटों तक खड़ी रहती गाड़ियां, परेशान लोग, स्कूली बच्चे और मरीज—यह नजारा अब बढ़नी का आम दृश्य बन चुका है। नेपाल सीमा से सटे इस छोटे से नगर में सुबह से लेकर शाम तक जाम का आलम ऐसा रहता है कि लोगों की सांसें भी थम जाती हैं। आसपास के गांव—तुलसीपुर, पचपेड़वा, इटवा आदि से आने वाले सैकड़ों लोग बाजार और कामकाज के लिए बढ़नी आते हैं, लेकिन रेलवे क्रॉसिंग पर फंसे ट्रैफिक से सबकी रफ्तार थम जाती है। नागरिकों का कहना है कि बिना अंडरपास बनाए ही वॉशिंग कोचिंग डिपो का उद्घाटन जनता के साथ अन्याय है। नगर निवासी पंकज जायसवाल, मनोज यादव, विजय जायसवाल और डॉ0 महबूब आलम ने कहा कि रेलवे लाइन पार करने में कई बार एक-एक घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। बच्चों की स्कूल बसें लेट होती हैं, मरीजों को अस्पताल पहुंचने में कठिनाई होती है। उन्होंने सवाल उठाया—क्या यही है विकास की परिभाषा? स्थानीय लोगों का मानना है कि बस स्टॉप तिराहे के पास अंडरपास रेलवे वॉशिंग कोचिंग डिपो बना बढ़नी की जनता के लिए मुसीबत, घंटों जाम में कैद होती है ज़िंदगीबनाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि बाजार और सीमा क्षेत्र की आवाजाही सुचारु हो सके। नगर पंचायत बढ़नी निवासी मोहन भारती, पिंटू जायसवाल, सनी गुप्ता, विक्की जायसवाल ने कहा कि सीमा क्षेत्र होने के कारण शाम के वक्त ट्रकों की लंबी कतारें लग जाती हैं। शादी-ब्याह या पर्व-त्योहार के दिनों में तो हालात और भी बदतर हो जाते हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को मुड़िला बाईपास से होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। कई बार मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है। रेलवे इंजीनियर ने बताया कि बाईपास का प्रस्ताव स्वीकृत है और सांसद द्वारा अंडरपास की घोषणा की गई है, जल्द ही रूपरेखा तय की जाएगी। जनता का साफ कहना है कि पहले अंडरपास बने, तब कोचिंग डिपो की बात की जाए। फिलहाल तो विकास की रफ्तार रेलवे ट्रैक पर नहीं, जाम में फंसी दिखाई दे रही है।