गन्ने के साथ लहसुन की खेती किसानों के लिए वरदान: ओपी गुप्ता

तोरिया का बीज ले जाए किसान: रविंद्र सिंह
KUSHINAGAR NEWS: जिले में किसान धान काटकर शरदकालीन गन्ने की बुवाई प्रारंभ कर दिए हैं। गन्ने के साथ लहसुन की सहफसली खेती, किसानों के लिए वरदान व दोहरा लाभ देती है। गन्ने की बुवाई 4 फीट पर करें तथा गन्ने की दो लाइनों के बीच लहसुन की तीन या चार पंक्ति बोयें, यह जानकारी पूर्व सहायक निदेशक वह गन्ना विशेषज्ञ ओम प्रकाश गुप्ता ने कसया के ग्राम अभिनायकपुर में दी। गन्ने की अधिक उपज देने वाली प्रमुख प्रजातियां को. 0118, को.शा. 13235, को. लख. 14201 हैं। जल भराव वाले खेतों में को.पी. 9301 की बुवाई करें। भूमि उपचार के लिए ट्राइकोडर्मा का प्रयोग करें। गन्ने की दो आंखें गेड़ी को हेक्सास्टॉप के घोल में उपचारित करें। लहसुन के लिए एक एकड़ खेत में अंतिम जुताई के समय 70 से 80 कुंतल गोबर की सड़ी खाद प्रयोग करें। गन्ने की दो लाइन के बीच 50 किलोग्राम डीएपी तथा 30 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ़ पोटाश प्रयोग करें। लहसुन की कली जावा की बुवाई लाइन से लाइन की दूरी 15 सेंटीमीटर तथा पौध से पौध की दूरी 10 सेमी रखें। लहसुन की फसल मार्च माह में तैयार होगी। एक एकड़ में 45 से 50 कुंतल लहसुन की उपज होगी। 50 रुपए किलो बेचने पर दो से ढाई लाख का लहसुन होगा। लहसुन गन्ने में कीट नियंत्रण करेगा। गन्ने के उपज 300 से 400 कुंतल एकड़ होगी, जिससे आय बढ़ेगी तथा उत्पादन लागत कम होगी।ढाढ़ा चीनी मिल परिक्षेत्र में अधिशासी अध्यक्ष आरके गुप्ता के मार्गदर्शन में गन्ना क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं संचालित की जा रहीं हैं।  उपाध्यक्ष ‘गन्ना’ रविंद्र सिंह ने किसानों को बताया की तोरिया का बीज 50% अनुदान पर दिया जा रहा है। किसान अपने चीनी मिल कर्मचारियों से मिलकर बीज प्राप्त करें तथा गन्ने में बुवाई करें। ट्राइकोडर्मा, जैविक पोटाश, कृषि यंत्र सभी अनुदान पर दिया जा रहा है। सहायक उपाध्यक्ष ‘गन्ना’ मनोज बिश्नोई ने बताया नवंबर माह में दो दर्जन से अधिक शरदकालीन गन्ना विकास गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। प्रगतिशील किसान ओम प्रकाश राय रामचंद्र यादव ने कहा कि गन्ना कटाई, छिलाई की व्यवस्था किया जाए।

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