वंदे मातरम गीत की व्याख्या कर देश प्रेम के लिए जागरूक

KAUSHAMBI NEWS: राजकीय महाविद्यालय सिराथू में शनिवार को प्राचार्य प्रोफेसर संजय प्रसाद शर्मा के निर्देशन में एक व्याख्यान आयोजित किया गया, जिसके अंतर्गत “वंदे मातरम गीत के राष्ट्रीय एकता एवं स्वतंत्रता संग्राम में योगदान” पर विस्तृत चर्चा की गई। इतिहास विभाग की विभागा ध्यक्ष एवं कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रोफेसर मीरा पाल ने उक्त विषय पर ऐतिहासिक दृष्टिकोण से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह गीत सिर्फ स्वतंत्रता आंदोलन के समय ही नहीं, बल्कि आज भी जहां बजता है, हमारे खून में उमंग का भाव प्रदर्शित होने लगता है। वंदे मातरम गीत को आनंद मठ का पात्र भावानंद ने 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गया था। इस अवसर पर प्राचार्य प्रोफेसर संजय प्रसाद शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि ‘आनंद मठ’ प्रसिद्ध रचनाकार पंडित बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का बंगाली उपन्यास है, जिसकी विषय वस्तु 18वीं शताब्दी के सन्यासी विद्रोह पर आधारित है। यह उपन्यास भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरणा स्रोत रहा है। कार्यक्रम का संचालन और आभार ज्ञापन डॉ. उत्तम कुमार शुक्ल असिस्टेंट प्रोफेसर हिंदी विभाग ने किया । इस अवसर पर महाविद्यालय स्टाफ डॉक्टर स्मिता पाल, डॉ. अयूब अहमद, डॉ.धर्मेंद्र सिंह, डॉ. जसविंदर कौर और डॉ. विपुल सिंह उपस्थित रहे।

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