सेवा और शौर्य की प्रतिमूर्ति: भाऊराव देवरस और रानी लक्ष्मीबाई को श्रद्धांजलि

LAKHIMPUR KHERI NEWS: बुधवार को, विद्याभारती विद्यालय पण्डित दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज (यू०पी० बोर्ड) ने दो महान राष्ट्रीय विभूतियों— राष्ट्र स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्वर्गीय भाऊराव देवरस तथा 1857 की क्रांति की नायिका वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई—की जयंती पर वंदना सभा में एक अत्यंत प्रेरणादायक और भव्य समारोह आयोजित किया। इस अवसर पर छात्रों को देश के सामाजिक और राष्ट्रीय पुनरुत्थान में इन व्यक्तित्वों के योगदान से परिचित कराया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रधानाचार्य डॉ० योगेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और दोनों महानुभावों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक और छात्र उपस्थित रहे। वक्ताओं ने दोनों व्यक्तित्वों के विशिष्ट पहलुओं पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला भैया अध्ययन पटेल ने बताया कि रानी लक्ष्मीबाई का जीवन हमें सिखाता है कि साहस का कोई लिंग नहीं होता और हमें कभी भी अन्याय के सामने झुकना नहीं चाहिए। उनका यह बलिदान हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता का मूल्य क्या है और हमें हमेशा अपने राष्ट्र के स्वाभिमान की रक्षा करनी है।” भैया शिवाय तिवारी कक्षा 7 ने अपने वक्तव्य में कहा, “भाऊराव देवरस जी का जीवन हमें बताता है कि निःस्वार्थ सेवा ही सच्चा राष्ट्रधर्म है। उन्होंने बिना किसी प्रचार के, समाज के लिए जो कार्य किए, वे हमें सिखाते हैं कि बड़े बदलाव के लिए मौन और संगठित प्रयास कितने ज़रूरी होते हैं। हमें उनकी सादगी और अनुशासन को अपने जीवन में उतारना चाहिए।” विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ० योगेन्द्र प्रताप सिंह ने दोनो विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “सेवा और शौर्य की ये दो धाराएँ हमें यह सीख देती हैं कि देश की सेवा अलग-अलग रूपों में की जा सकती है। हमें भाऊराव जी की तरह समर्पित भाव से समाज को संवारना है और रानी लक्ष्मीबाई की तरह अन्याय के सामने कभी झुकना नहीं है।” यह भव्य कार्यक्रम छात्रों और शिक्षकों को राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास और सेवा परंपरा से जोड़ने में सफल रहा।कार्यक्रम का संचालन आचार्य सर्वेन्द्र अवस्थी ने किया।

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