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पात्र होने के बावजूद नाम हटने पर परिवार में आक्रोश
ग्रामीणों ने कहा— तथ्यों की सही जाँच के बिना काटे जा रहे नाम
FATEHPUR NEWS: एसआईआर (विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण) सूची में लगातार गड़बड़ियों और विसंगतियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पात्र वोटरों के नाम सूची से हटने और कई अपात्र लोगों के नाम बने रहने के मामले बार-बार सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में खागा तहसील क्षेत्र के मोहम्मदपुर गौंती ग्राम की निवासी माया देवी पत्नी कमलेश कुमार का नाम एसआईआर सूची से गायब होने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। परिवार के अनुसार प्रारम्भिक सूची जारी हुई थी, तब माया देवी का नाम उसमें दर्ज था। परिवार को उम्मीद थी कि उनका नाम वोटर लिस्ट में था और माया हर चुनाव में मतदान करती थीं लेकिन एसआईआर की उपलब्ध सूची में उनका नाम नदारद मिला, जिससे परिवार और मोहल्ले के लोग आक्रोशित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि माया देवी का नाम मतदाता सूची में रहना स्थानीय नागरिक के लिहाज़ से अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में बिना कारण नाम हटाया जाना सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्वाचन आयोग या एसआईआर टीम द्वारा बिना ठोस और प्रत्यक्ष जाँच के ही नाम काटे जा रहे हैं। वहीं माया देवी के परिवार ने इस बाबत संबंधित अधिकारियों से लिखित शिकायत करने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं किया गया तो वे जिला स्तर पर भी शिकायत दर्ज कराएंगे। इस बीच आसपास के कई ग्रामीणों ने भी बताया कि उनके परिवारों के नाम भी प्रथम सूची से हटाए गए हैं, जबकि वे पात्र श्रेणी में आते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वर्तमान सूची की पुनः समीक्षा कराई जाए और सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए। एसआईआर सूची से हटाए गए सभी पात्र लोगों के नाम संशोधित सूची में शामिल किए जाएं, ताकि उन परिवारों को मतदान से वंचित न होना पड़े। उधर प्रशासनिक स्तर पर संबंधित विभाग का कहना है कि सत्यापन के दौरान मिले अद्यतन तथ्यों के आधार पर सूची संशोधित की गई है। किसी भी व्यक्ति को बिना आधार के वंचित नहीं किया जाएगा और शिकायत आने पर पुनः परीक्षण कराया जाएगा। इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी चिंताएं व्यक्त की हैं। उनका कहना है कि यदि समीक्षा सही और समय पर नहीं हुई तो दर्जनों परिवार प्रभावित होंगे। ऐसे में एसआईआर सूची को पारदर्शी और तथ्यात्मक बनाने की दिशा में प्रशासन को तत्काल ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।