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बारा, प्रयागराज। बारा तहसील अंतर्गत सोनबरसा गांव में 14 जून 2025 की मध्य रात्रि को हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। आकाशीय बिजली गिरने से एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस हादसे में वीरेंद्र पुत्र छोटे, उनकी पत्नी पार्वती, तथा उनकी दो बेटियां राधा और करिश्मा की जान चली गई थी। इस भीषण त्रासदी के बाद परिवार में केवल दो नाबालिग बेटियां सोनकुमारी और आंचल ही जीवित बचीं।
घटना के बाद प्रशासन, जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। तत्कालीन उप जिलाधिकारी बारा संदीप तिवारी ने दोनों बच्चियों को भरोसा दिलाया था कि सरकार की ओर से मिलने वाली सभी सुविधाएं उन्हें उपलब्ध कराई जाएंगी। आश्वासन दिया गया था कि दोनों नाबालिग बच्चियों को 18 वर्ष की आयु तक ₹4000 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाएगी, साथ ही उन्हें आवास भी आवंटित किया जाएगा ताकि वे सुरक्षित जीवन जी सकें।
घटना के समय क्षेत्रीय विधायक, इलाहाबाद के सांसद समेत कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि गांव पहुंचे थे। सभी ने संवेदना जताई और पीड़ित बच्चियों को हर संभव सहायता देने का वादा किया। लेकिन घटना को अब छह महीने से अधिक का समय बीत चुका है, इसके बावजूद न तो कोई अधिकारी दोबारा गांव पहुंचा और न ही किसी भी सरकारी योजना का लाभ इन बच्चियों तक पहुंच पाया।
आज हालात यह हैं कि दोनों नाबालिग बहनें सोनकुमारी और आंचल सोनबरसा गांव में ही दूसरे ग्रामीणों के यहां मजदूरी करने को मजबूर हैं। दिन भर मेहनत करने के बाद ही उन्हें दो वक्त की रोटी नसीब हो पाती है। पढ़ाई, इलाज, रहने की व्यवस्था और भविष्य की चिंता ने इन मासूम बच्चियों का बचपन छीन लिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के बाद शुरू में प्रशासन की सक्रियता दिखी, लेकिन समय बीतने के साथ सभी वादे कागजों तक ही सिमट कर रह गए। न तो आर्थिक सहायता मिली, न आवास की व्यवस्था हुई और न ही बच्चियों के भरण-पोषण की कोई ठोस योजना लागू की गई। इससे ग्रामीणों में भी प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जिला प्रशासन इस मामले का संज्ञान ले और तत्काल प्रभाव से दोनों बच्चियों को घोषित सरकारी सहायता उपलब्ध कराए। साथ ही दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, जिन्होंने आश्वासन तो दिए लेकिन उन पर अमल नहीं कराया।एक ओर सरकार आपदा पीड़ितों के लिए कई योजनाओं का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर सोनबरसा गांव की ये दो मासूम बच्चियां आज भी सरकारी मदद की बाट जोह रही हैं। सवाल यह है कि आखिर इन बच्चियों को कब न्याय और सहायता मिलेगी, और कब प्रशासन अपने वादों को हकीकत में बदलेगा।