गौवंश का संवर्धन क्यों नहीं हो पा रहा है?-प्रवीण मिश्र

LUCKNOW NEWS: कहा जाता है कि जब तक सही स्विच नहीं दबेगा तब-तक बल्ब नहीं जलता। आज सभी लोग गाय का उपयोग दूध के लिए मान रहे हैं। परंतु गाय का मुख्य उत्पाद दूध तो है ही नहीं है यह तो गाय का प्रसाद है। गाय का मुख्य उत्पाद शक्ति है अर्थात बछड़ा जो बैल बनता है। दूसरे नंबर का उत्पाद गोबर है जिसे  हमारे शास्त्रों में वरदान कहा गया है। गोबर का उपयोग हम तीन प्रकार से किया जाता है। सबसे पहले इसका उपयोग  खाना पकाने के लिए किया जाता है यह खाना पकाने का सर्वोत्तम इंधन है। वैज्ञानिकों का कहना है कि  कम आंच पर धीरे-धीरे पकने वाला भोजन स्वादिष्ट ही नहीं पौष्टिक भी होता है। जब  हम गोबर का उपयोग खेती में खाद के रूप में करते है तो यह गोबर धरती के अंदर रहने वाले असंख्य जीवों का भोजन बनता है वही जीव  भोजन कर के इसे कंपोस्ट खाद के रूप में बदल देतें है उसी से पेड़ पौधे अपना भोजन बनाते हैं  और उस पेड़ पौधे से जो उत्पादन होता है वह मानव जीवन  यापन का सर्वोत्तम खाद्य उत्पाद होता है। इसी प्रकार गोबर का प्रयोग हम अपने घर को पवित्र करने के लिए करते हैं तो यह तमाम बैक्टीरियों का विनाशक होता है।
इन तीनों का स्थान कारपोरेट उत्पादों ने ले लिया जिससे खाने के लिए एलपीजी का प्रयोग होने लगा कृषि उत्पादन के लिए यूरिया डाई खाद और पेस्टीसाइड्स का प्रयोग होने लगा है। बैल शक्ति की जगह मशीनरी शक्ति का प्रयोग होने लगा। हम गोबर से दीया पेंट और न जाने किन किन उत्पादन के लिए प्रयोग किया जा रहा है पर न तो इसका उपयोग भोजन पकाने के लिए या खाद के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। हम चीता शेर  सांप चिड़िया पक्षी के संरक्षण की बात तो करते हैं यहां तक कुत्तों के भी संरक्षण की बात की जाती है परंतु बैलों के संरक्षण का नाम कहीं पर नहीं आता है । पहले हम इन्हीं बैलों की उर्जा से खेत जोतते थे सिंचाई करते थे परिवहन में उपयोग लेते कृषि के सभी कार्य कोल्हू, चक्की, रहट जैसे सभी कार्य बैलों से ही होता रहा है परन्तु आज मशीनों के अंधे दौड़ में इनकी उर्जा को भूल गए। जब तक हम बैल की ऊर्जा का उपयोग नहीं करेंगे  गोबर का उपयोग खेती और रसोई के लिए नहीं करेंगे तब तक न तो हम समृद्धशाली  होंगे न ही गौवंश सुरक्षित होंगे।

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