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KOLKATA/BANGAL NEWS: कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भगवा गिरोह ने RSS के शताब्दी वर्ष और बंगाल चुनाव में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण तेज करने के मद्देनजर 5 लाख लोगों के द्वारा सार्वजनिक गीता पाठ का कार्यक्रम रखा था।उसमें एक गरीब चिकन पेटिस विक्रेता जो कि मुस्लिम था पेटिस बेच रहा था। वहां उसके धर्म को पूछकर संघी गुंडों ने उसकी पिटाई कर दीऔर उसके सामान को उठाकर फेंक दिया।आंकड़ों के मुताबिक बंगाल में नब्बे फीसद जनता जिसमें ब्राह्मण भी हैं ,मांसाहारी हैं। जिन भगवा गुंडों ने चिकन पेटिस विक्रेता फेरीवाले को बेरहमी से मारा ,संभावना ये है कि वे भी अपने घर में मांस मछली का सेवन करते होंगे।ममता बनर्जी की पुलिस ने भगवा गिरोह के कुछ लोगों को गिरफ्तार किया और केस को ऐसा बनाया कि फेरीवाले की पिटाई करने वाले भगवा गुंडों को आसानी से जमानत मिल गई।किस्सा यहीं पर खत्म नहीं हुआ।अपराधियों के जेल से छूटने के बाद विधानसभा में बंगाल भाजपा के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु चटर्जी जो एक समय तृणमूल कांग्रेस के नेता थे और ममता बनर्जी के करीब थे (फिलहाल राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब देख रहे हैं ) ने अपने चेले चपाटों के साथ उन भगवा गुंडों का सार्वजनिक सम्मान किया।ठीक वैसे ही जैसे गुजरात में बिल्किस बानो के साथ निर्मम अत्याचार करने वाले बलात्कारियों और हत्यारों के जेल से छूटने के बाद संघ -भाजपा के नेताओं ने संस्कारी ब्राह्मण कहकर उनका सार्वजनिक सम्मान किया था। अब ये तो सभी जानते हैं कि फासिस्ट संघ परिवार के लिए मुसलमानों ,दलितों उत्पीड़ितों महिलाओं, आदिवासियों और गरीब मेहनतकश जनता को प्रताड़ित करने वाले लोग ही सच्चे महावीर या परमवीर हैं।इसमें भी कोई अचरज नहीं है कि दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने फासीवादी आतंकवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भाजपा जिसका राजनैतिक अंग है कि जहरीली राजनीति और संस्कृति सिर्फ और सिर्फ नफ़रत और विभाजन पर आधारित है।लेकिन इसका सामना सत्तारूढ़ TMC कैसे कर रही है ? जो खुद को मुसलमानों का रहनुमा घोषित करती है।ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने फासिस्ट संघ परिवार के साम्प्रदायिक फासीवाद का सामना करने के लिए पहले मस्जिद के इमामों के लिए भत्ता मुकर्रर किया।अब वह राज्य में दीघा के समुद्र तट पर पूरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज़ पर मंदिर बना रही है ।यही नहीं ममता बनर्जी,उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज़ पर बंगाल में महाकाल मंदिर बना रही है। असल में ममता बनर्जी को भी विरासत में कांग्रेस की बीमारियां मिली हुई है।जिस तरह कांग्रेस ने जवाहर लाल नेहरू के बाद धर्मनिरपेक्षता की नीतियों को तिलांजलि देकर सर्व धर्म सद्भाव की नीति को अपनाया उसी तरह ममता ने भी धर्मनिरपेक्षता को छोड़कर सभी धर्मों के तुष्टिकरण को अपनाया।वो जिस रास्ते पर बढ़ रही है वो रास्ता भूपेश बघेल द्वारा छत्तीसगढ़ में अपनाया हुआ नर्म हिंदुत्व का रास्ता है।बंगाल की बहुमत जनता फासिस्ट संघ परिवार और उसके हिंदुराष्ट्र परियोजना के खिलाफ है और इसलिए भाजपा के खिलाफ वो ममता बनर्जी को नकारात्मक वोट देकर जिताती है।ममता बनर्जी को यह नहीं भूलना चाहिए कि छत्तीसगढ़ में संघ- भाजपा के हिंसक हिंदुत्व के मुकाबले कांग्रेस ने धर्मनिरपेक्षता मतलब सरकारी काम काज और धर्म दोनों को अलग करने की जगह ,नर्म हिंदुत्व को अपनाकर यही गलती की थी।सो फासिस्ट संघ परिवार के मैदान में उन्हीं के नियमों से खेलने से कांग्रेस छत्तीसगढ़ में सत्ता से बाहर हो गई।