फतेहपुर में ‘लोकेशन खेल’ पर कार्रवाई या दिखावा? छोटे प्यादों पर शिकंजा, बड़े मगरमच्छ बेखौफ

जनपद में अवैध खनन का डिजिटल खेल, रीलबाज फंसे जबकि नेटवर्क चलाने वाले बेखौफ

FATEHPUR NEWS: (शीबू खान) जनपद में इन दिनों अवैध खनन और ओवरलोडिंग से जुड़े ‘लोकेटर नेटवर्क’ पर पुलिस व प्रशासन की धरपकड़ तेज़ बताई जा रही है। लेकिन इस कार्रवाई को लेकर अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि क्या वास्तव में पूरे नेटवर्क पर प्रहार हो रहा है, या फिर सिर्फ छोटे प्यादों को ही बलि का बकरा बनाया जा रहा है? सूत्रों की मानें तो लोकेशन के इस पूरे खेल में सिर्फ दो-चार लोकेटर या सोशल मीडिया पर रील बनाने वाले चेहरे ही नहीं, बल्कि खनन विभाग, आरटीओ, पुलिस प्रशासन से जुड़े कुछ विभागीय कर्मचारी और अधिकारी भी कहीं न कहीं संलिप्त बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद कार्रवाई का दायरा सीमित लोगों तक ही सिमटता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि फतेहपुर जिला मुख्यालय से सटा एक गांव इस पूरे लोकेशन नेटवर्क का प्रमुख केंद्र है। सूत्रों के अनुसार यहां के अधिकांश मोटर मालिक पूरी तरह से लोकेशन के काम में सक्रिय हैं। बावजूद इसके, अब तक कार्रवाई सिर्फ एक-दो नामचीन या चर्चित चेहरों तक ही सीमित रही है, जबकि गांव के भीतर गहराई से जमी जड़ें अब भी सुरक्षित हैं। जहां अभी तक किसी के न तो हांथ पहुंचे हैं और न ही निगाहें पहुंची हैं। जनपद में चर्चा है कि अगर वास्तव में निष्पक्ष और ईमानदार जांच हो, तो लोकेशन नेटवर्क से जुड़े कई बड़े चेहरे, मोटर मालिक, बिचौलिये और विभागीय गठजोड़ सामने आ सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पूरे मामले में सिर्फ छोटे लोकेटरों पर कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपाता है, या फिर बड़े मगरमच्छों तक भी कानून का शिकंजा पहुंचाता है। जनता की निगाहें टिकी हैं और जवाब की प्रतीक्षा है।
दूसरे जनपदों तक फैला साम्राज्य
लोकेशन का यह खेल सिर्फ फतेहपुर तक सीमित नहीं है। बांदा, कानपुर, रायबरेली सहित अन्य जनपदों के लोग भी इस नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ट्रकों की आवाजाही, चेकिंग प्वाइंट्स की सूचना और रास्तों की जानकारी समय से पहले पहुंचाई जाती है, जिससे अवैध खनन और ओवरलोड वाहनों को आसानी से रास्ता मिल जाता है।
‘इंट्री’ के नाम पर वसूली की चर्चा
सूत्र यह भी बताते हैं कि खनन विभाग में तैनात कुछ ड्राइवर और कर्मचारी ‘इंट्री’ के नाम पर वसूली में शामिल बताए जा रहे हैं। बिना इंट्री के वाहन निकल नहीं पाते और इंट्री के नाम पर मोटी रकम का खेल चल रहा है। यही वजह है कि पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में आ गया है।
बड़ा सवाल: निष्पक्ष जांच कब?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर लोकेशन का खेल इतना व्यापक है, तो कार्रवाई सिर्फ चुनिंदा लोगों पर ही क्यों? क्या बड़े नाम और रसूखदार लोग जांच के दायरे से बाहर हैं? क्या यह कार्रवाई केवल दबाव कम करने की औपचारिकता है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *