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MIRZAPUR NEWS: (अमरेश चन्द्र पाण्डेय) प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बुलडोजर, माफियाओं, खेत-खलिहानों, अवैध निर्माणों को विंध्वस करते हुए अब बच्चों तक पहुंच गया है। बुलडोजर की लोकप्रियता इस कदर बढ़ी कि वह प्रदेश से पूरे देश होते हुए विदेशों तक पहुंच गया। परिणाम दुनिया के दर्जनों देश, इटली, फ्रांस व अन्य देश, की कानून व्यवस्था संभालने हेतु, कोई छ महीनों के लिये तो कोई एक साल के लिये योगी आदित्यनाथ व उनकी बुलडोजर की मांग करने लगे। लेकिन वहीं बुलडोजर अब छोटे-छोटे बच्चों तक पहुंच गया। बुलडोजर की लोकप्रियता ऐसी बढ़ी कि “बाबाजी का बुलडोजर” नाम से अब बच्चों के मन पसन्द खाद्य पदार्थ ‘कुरकरे’ तक पहुंच गया जिसे बच्चे बड़े ताव से खा रहे हैं, और गांवों की दुकानों पर बच्चे बाबाजी का बुलडोजर दीजिये, ऐसा कह कर मांग रहे हैं। योगी आदित्यनाथ को इतनी बड़ी सामाजिक स्वीकार्यता एवं देशव्यापी लोकप्रियता ऐसे ही नहीं मिली है, उसके पीछे उनका त्याग, उनकी तपस्या व उनका अथक परिश्रम है। साथ ही उनके पास वह बल है जिससे वे अजेय बने हैं और बने रहेंगे। वह बल जो बिरलों के पास होता है। वह बल है चरित्र बल। संसार में यहीं एक ऐसा बल है, जो अभेद्य दिवार में भी छेद बना सकता है। दुनिया में यहीं वह बल है, जिसके सामने बाहुबल, धन बल, तन बल व जितने भी बल हैं, सब पराजित हो जाते हैं। यह बल विश्व के बिगड़ैल दरोगा डोनल्ड ट्रंप के पास भी नहीं है। संस्कृत में एक श्लोक है, जिसका हिन्दी में अर्थ है, सिंहनी का एक ही पुत्र यदि बाहर बैठा हो, तो किसी में हिम्मत नहीं कि मांद में सो रही उसकी मां की नींद में खलल पैदा कर सके, लेकिन गदही के दस पुत्र भी किस काम के।” लोकप्रियता इतनी की देश के सबसे बड़े डॉन हाजी मस्तान की पुत्री सखी मस्तान महाराष्ट्र में बैठकर योगी आदित्यनाथ की खुले दिल से तारीफ कर रही है और एक चैनल को दिए गए साक्षात्कार में कह रही हैं कि भारतीय राजनीत में योगी जैसा कड़ा फैसला लेने वाला अब तक कोई नहीं दिखाई पड़ा। उनका कहना है कि उनकी पीड़ा योगी ही सुन सकते है और उसे दूर कर सकते है। लेकिन उनका दुर्भाग्य है कि योगी महाराष्ट्र में नहीं है। फिर भी वे योगी जी से मिलकर उन्हें अपनी पीड़ा अवश्य सुनाएगी। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह से भी मिलना चाहती है। लेकिन उनका पूरा भरोसा व पूरा विश्वाश योगी जी पर टीका है। नरेंद्र मोदी व योगी आदित्यनाथ ऐसे ही ‘सिंहिनी’ के दो पुत्र हैं, जिनके रहते देश व प्रदेश अक्षुण रहेगें।