कार्यस्थल पर कार्य करने हेतु सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने पर बल देता है पॉश एक्ट:अमित मिश्रा

विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर में बाल विवाह मुक्त भारत हेतु दिलाई गई शपथ
KAUSHAMBI NEWS: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कौशाम्बी के तत्त्वावधान में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, जानकीपुर, चायल कौशाम्बी में शोषण के विरुद्ध अधिकार, पॉश एक्ट और बच्चों के अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में बच्चों को संबोधित करते हुए अधिवक्ता संदीप द्विवेदी जी ने कहा कि अगर बच्चों के साथ कोई दुर्व्यवहार होता है तो यथाशीघ्र जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय, परा विधिक स्वयं सेवक, बच्चे के स्वास्थ्य सेवा प्रदाता, स्थानीय बाल कल्याण एजेंसी, पुलिस विभाग या टोलफ्री हेल्पलाइन नंबर्स से संपर्क करना चाहिए या फिर तहसील विधिक सहायता क्लीनिक में कार्यरत पीएलवी भी संपर्क कर सकते हैं।
डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने बाल अधिकार और शोषण के  विरुद्ध बालकों के अधिकारों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अधिवेशन, किशोर न्याय अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम और राष्ट्रीय बाल नीति आदि के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र के प्रत्येक बच्चे को बालक माना गया है। बच्चों को मारना, चिढ़ाना, मजाक करना, मजदूरी करवाना, उनके साथ छल करना, उनकी बात अनसुनी करना, अश्लील चित्र या किताब दिखाना, भद्दे इशारे करना, गाली-गलौच करना, डराना-धमकाना, तंग करना व बलात्कार आदि जैसे कृत्य अपराध की श्रेणी में आते हैं। बाल अधिकारों के हनन को रोकने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 और 24 में शोषण के विरूद्ध अधिकारों का प्रावधान है। अनुच्छेद 45 में बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है। बाल मज़दूरी (निषेध एवं नियमन) अधिनियम, 1986 के मुताबिक 14 साल से कम उम्र के किसी बच्चे को किसी कारखाने या खदान में काम नहीं लगाया जा सकता। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो एक्ट) के तहत, बालक के लिए मित्रतापूर्ण वातावरण बनाए रखने का प्रावधान है। महिला कल्याण विभाग कौशाम्बी से संरक्षण अधिकारी अजीत कुमार जी ने विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, स्पांसरशिप योजना, निराश्रित महिला पेंशन योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना आदि के बारे जानकारी प्रदान किया।
चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल अमित मिश्रा ने कहा कि बाल अधिकारों के हनन व बच्चों के शोषण से उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से गहरी चोट पहुंचती है और उनका स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास भी प्रभावित होता है। महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013′ जिसे पॉश एक्ट भी कहा जाता है, भारत में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने, प्रतिबंधित करने और उसका समाधान करने के लिए एक सशक्त कानूनी ढांचा है। यह महिलाओं को प्रोटेक्ट करता है। यह कानून सरकारी और निजी सभी प्रकार के संगठनों और संस्थानों में शिकायत समितियों के गठन, जागरूकता कार्यक्रम चलाने और कार्य करने हेतु सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने पर बल देता है,  जिससे यौन उत्पीड़न से पीड़ित महिलाएँ भयमुक्त होकर शिकायत कर सकें और न्याय पा सकें। साथ ही राष्ट्रीय, राज्य और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा प्रदत्त सेवाओं आदि के बारे में विस्तार से बताया। यदि किसी बालक के अधिकारों का उल्लंघन होता है तो हेल्पलाइन नंबर्स 1090, 1098, 181 आदि पर संपर्क कर सकते हैं या फिर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय द्वारा नियुक्त पीएलवी के जरिए शिकायत करें या विधिक सेवा प्राधिकरण के टोल फ्री नंबर 15100 पर शिकायत दर्ज कराएं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता, उत्तर प्रदेश पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना, आपदाग्रस्त लोगों की मदद आदि से संबंधित प्रदान की जाने वाली सेवाओं के बारे में भी विस्तार से बताया।
धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय की अधीक्षिका ममता अंजली जी ने किया।
शिविर के अंत में उपस्थित छात्राओं को बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत शपथ भी दिलाई गई। इस अवसर पर विद्यालय के  शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित छात्राएं भी बड़ी संख्या में मौजूद रहीं।

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