आनन्द नारायण पाठक ‘अभिनव’ को बिलासा साहित्य सम्मान एवं प्रणत पुस्तक पर मैजिक बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से भी हुए सम्मानित

KAUSHAMBI NEWS: भगवान बुद्ध की कर्मभूमि से भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर आयोजित साहित्यिक आयोजन में हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में एक गरिमामयी अध्याय जुड़ गया। रायपुर में आयोजित बिलासा छन्द महालय के दीक्षांत समारोह में देशभर से आए साहित्यकारों, विद्वानों एवं साधकों की उपस्थिति ने आयोजन को दिव्य और भव्य स्वरूप प्रदान किया।इस अवसर पर कौशाम्बी जनपद के नगरपंचायत दारानगर कड़ाधाम निवासी हिन्दी साहित्य के उन्नयन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले आनन्द नारायण पाठक ‘अभिनव’ को विशिष्ट सम्मान प्राप्त हुआ। उन्हें बिलासा छन्द महालय की ओर से बिलासा साहित्य सम्मान प्रदान किया गया, जिसे उन्होंने गुरुओं के आशीर्वाद स्वरूप स्वीकार किया।
समारोह में छन्द विधान के अभिनव सर्जक, बिलासा छन्द महालय के संस्थापक डॉ. रामनाथ साहू ‘ननकी’ तथा छन्दों को व्यवस्थित रूप देने में सिद्धहस्त डॉ. माधुरी डडसेना के साहित्यिक अवदान को विशेष रूप से स्मरण किया गया। मंचासीन विद्वानों के प्रेरणादायी उद्बोधनों ने भारत को ज्ञानियों की भूमि सिद्ध किया।आनन्द नारायण पाठक ‘अभिनव’ को  उनके द्वारा सहायक रचनाकार के रूप में लिखी गयी “अर्ध सम मात्रिक नव प्रस्तारित छन्द”  पर लिखित *प्रणत* पुस्तक के लिए मैजिक बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा सम्मानित किया गया, जो उनके साहित्यिक जीवन की एक उल्लेखनीय उपलब्धि रही।उन्होंने अपने साधना काल में मार्गदर्शन एवं स्नेह प्रदान करने वाली परम सिद्धिश्वरी शीलू जी, साथ ही डॉ. गजेंद्र सिंह हरिहरनो, आदरणीय जयहिंद सिंह जी एवं अन्य गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। आभासी गुरुजनों एवं सहपाठी साधकों से प्रत्यक्ष मिलन को उन्होंने नई ऊर्जा का स्रोत बताया।समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए सरस्वती पुत्रों एवं पुत्रियों के सान्निध्य ने साहित्यिक सौहार्द और एकता का अनुपम दृश्य प्रस्तुत किया। आयोजकों एवं समस्त साहित्यकारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आनन्द नारायण पाठक ‘अभिनव’ ने इस सम्मान को अपने जीवन का चिरस्मरणीय क्षण बताया।

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