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कहा कि सरकार समाज को बांटने से बाज आये
मठ मछली बंदर मठ मे खेली गयी फूल, अबीर – गुलाल की होली
जगदगुरू स्वामी शाडिल्य महराज ने किया स्वागत, कहा कि सुप्रीम कोर्ट धन्यवाद
PRAYAGRAJ NEWS: जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती महराज, अखिल भारतीय दण्डी संन्यासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश्वर स्वामी ब्राह्मश्रम महराज, पीठाधीश्वर स्वामी रामास्वामी शास्त्री महराज, श्रृंगवेरपुर धाम के जगदगुरू नारायणाचार्य स्वामी शाडिल्य महराज, जगदगुरू स्वामी रामसुभगदास बिनैका बाबा,
ओम नमः शिवाय के पूज्य गुरूदेव और जगदगुरू स्वामी अनंताचार्य महराज (अमृतदास) दमोह ने यूजीसी के नये कानून पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाये जाने का स्वागत किया है। संतों ने कहा कि सरकार का काम लोगो और समाज को एक करना है ना कि विघटन करना है, यह समाज और देश को बांटने वाला कानून था। इसको लागू करके सरकार समाज और देश के लोगों को क्या और कैसा संदेश देना चाहती थी। संतो ने कहा कि सरकार को इस तरह का कदम उठाने से पहले सोचना चाहिए कि कोई भी ऐसा कदम ना उठाए जिससे कि समाज बंटे और लोगों के बीच में सामाजिक विघटन बढे। श्रृंगवेरपुर धाम के जगदगुरू स्वामी शाडिल्य महराज ने यूजीसी के नये कानून पर रोक का स्वागत किया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इस नये कानून से जहां सामान्य वर्ग में व्यापक असंतोष था वही इस पर रोक लगाये जाने से राहत की सांस लिया है। स्वामी शाडिल्य महराज ने कहा कि सरकार को ऐसा कोई भी कानून नही बनाना चाहिए जिससे समाज बंटे और लोगों में आक्रोश बढे। माघ मेला के सेक्टर-6 गंगोली शिवाला मार्ग पर लगे मठ मछली बंदर मठ में आज यूजीसी के नये कानून पर रोक को लेकर फूलों की होली खेली गयी और सभी ने सुप्रीम कोर्ट को रोक लगाने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। संतों ने एक दूसरे के ऊपर अबीर, गुलाल और गुलाब के फूल डालकर होली खेली गयी। सभी संतों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी के नये कानून पर रोक लगाने का स्वागत करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार समाज को बांटने वाला कोई कदम ना उठाये बल्कि सर्व समाज को लेकर साथ चले।फूलों की होली खेलने वालों में अखिल भारतीय दण्डी प्रबंधन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश्वर स्वामी विमलदेव आश्रम, अखिल भारतीय दण्डी संन्यासी समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश्वर स्वामी ब्राह्मश्रम महराज, महामंत्री पीठाधीश्वर स्वामी शंकराश्रम महराज, स्वामी गोविन्द आश्रम, स्वामी विमल आश्रम, स्वामी प्रणव आश्रम, स्वामी सुदर्शन आश्रम, स्वामी ब्रिजेन्द आश्रम, स्वामी महेन्द्र, स्वामी योगेंद्र सहित बडी संख्या में संत, सन्यासी और कल्पवासी शामिल हुए।