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सलाम हो, मुजाहिदे राहे खुदा पर
LAKHIMPUR KHERI NEWS: फत्तेपुर सैधरी के रहने वाले मशहूर नौजवान अन्जुम काबकौसेन का योमे पैदाइश बड़े ही अकीदत व एहतराम से मनाया गया। इस मुबारक मौके पर रंग व नूर की महफिल सजाई गई। कुरान ख्वानी महफिल मिलाद का इनकाद हुआ। बाद नमाज मगरिब मौलाना मोहम्मद मेराज खान ने अपनी जौशीली तकरीर से समां बांध दिया। हाजरीन महफिल पुर लुप्त अनदोज होते रहे। इस के बाद मौलाना मोहम्मद कलीम रंगीलानगर ने नात-शरीफ का नजराना पेश किया। अल्हाज डा०रईस अहमद उस्मानी ने सलाम व दुरूद ताज पढ़ी- उन्होंने अपनी बात रखते हुए बताया कि- तारीख सिर्फ वाक्यात का मजमुआ नहीं, बल्कि वह किरदारों की तरजुमान भी है। कुछ किरदार इकतदार के लिए जीते हैं, और कुछ किरदार हक के लिए कुर्बान हो जाते हैं। कर्बला में इकतदार व तख्त वाली सियासत व किरदार शिकस्त खा गया- और हजरत अब्बास अलेहिस्सलाम की वफा इखलास और अताअत हमेशा के लिए जिन्दा हो गई। आज के नौजवान नस्ल के हाथ में ताकत भी है, तालीम भी है-और टेक्नोलॉजी भी है- आवाज भी है- मगर सवाल यह है कि किस के लिए ? अन्जुम काबकौसेन का किरदार बताता है कि ताकत अगर उसूल के बगैर हो- तो फसाद है, आप ने अपनी जवानी को कौम की खिदमत में फना कर दिया- यही अस्ल इनकलाबी अमल है।
अन्जुम काबकौसेन का वाजेह पैगाम है कि खुद को यजीदी निजाम का हिस्सा मत बनाओ। आगोश जुल्म में पनाह मत लो। जुल्म के सामने सकूत में आफिअत न समझों। आज भी अगर कोई सच के साथ खड़ा है-ताकत के सामने झुका नहीं और मजलूम की प्यास को अपनी प्यास पर मुकद्दम रखता है-तो समझ लो वह जिन्दा है। हजारो साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा।