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LAKHIMPUR KHERI NEWS: नगर पंचायत खीरी इन दिनों विकास कार्यों के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की परतें ढंकने के लिए रची जा रही ‘साजिशों’ के कारण चर्चा में है। 14 सभासदों के आरोपों से शुरू हुआ यह मामला अब हाई कोर्ट की दहलीज से होता हुआ ‘बैक-डेट’ की बैठकों और फर्जी एजेंडों के मायाजाल में फंस गया है।भ्रष्टाचार की आंच से बचने के लिए ‘शपथ पत्रों’ का सौदा?
ताजा घटनाक्रम के अनुसार, नगर पंचायत के अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी (EO) पर आरोप है कि उन्होंने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के दाग धोने के लिए सभासदों को लालच और दबाव के जाल में फंसा लिया है। जिन सभासदों ने पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ हुंकार भरी थी, उन्हीं में से कुछ ने अब यू-टर्न ले लिया है।बड़ा सवाल: आखिर वो कौन सी मजबूरी या ‘लालच’ था कि हाई कोर्ट में शपथ पत्र देने वाले, कदीर अहमद नसीम अहमद मो0 उबैद सुरेश सिंह राजकुमारी जैसे नाम अचानक कार्रवाई से पीछे क्यों और किस लालच में हट गए?अंधेर नगरी, चौपट राजा: बिना एजेंडा घर पर बुलाकर लिख डालीं 4 मीटिंग्स! शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि 16 फरवरी 2026 को जैसे ही प्रशासन ने जांच की सुगबुगाहट तेज की, अध्यक्ष और EO के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में 10-11 सभासदों को अध्यक्ष के निजी आवास पर बुलाया गया। नियमों की धज्जियां: न कोई एजेंडा जारी हुआ, न ही क्षेत्र के माननीय सांसद, विधायक या MLC को सूचना दी गई। कलम एक, मीटिंग चार: आरोप है कि भ्रष्टाचार को जायज ठहराने के लिए एक ही बार में चार पुरानी तारीखों (बैक-डेट) की मीटिंग्स रजिस्टर पर चढ़ा दी गईं। फर्जी प्रस्ताव: जांच से बचने के लिए आनन-फानन में कई नियम विरुद्ध प्रस्तावों पर हस्ताक्षर करा लिए गए हैं। जांच अधिकारी या ‘मैनेजर’? सभासदों का सीधा आरोप है कि नायब तहसीलदार सदर को जब इस मामले की जांच सौंपी गई, तो उन्होंने निष्पक्ष जांच करने के बजाय ‘मत्स्यता’ (बिचौलिये का काम) शुरू कर दी। शासन के बार-बार आदेश के बावजूद जांच को ठंडे बस्ते में डालना प्रशासन की मंशा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।न्याय की आस: जिलाधिकारी की चौखट पर सभासद आज वार्ड नंबर 7 के सभासद जहीरुल हसन और वार्ड नंबर 1 के सभासद मकसूद अली ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाई है कि खीरी नगर पंचायत में चल रहे इस ‘फर्जीवाड़े’ को रोका जाए। उन्होंने मांग की है कि बैक-डेट में लिखे गए प्रस्तावों को रद्द कर भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इन रसूखदारों पर लगाम कसेगा या भ्रष्टाचार की यह फाइल फाइलों में ही दफन हो जाएगी?