देर रात चौक जामा मस्जिद से चांद की तसदीक़ के बाद एक साथ शिया व सुन्नी समुदाय ने रखा पहला रोज़ा

PRAYAGRAJ NEWS:  खाड़ी देश में बुधवार को जहां पहला रोज़ा था तो भारतीय मुस्लिम समाज भी बुधवार शाबान की उनतिस को रमज़ान के चांद के दीदार के लिए पूरी उम्मीद से था। मग़रिब की नमाज़ के बाद खूब पटाखे भी फोड़े गए और जम कर मुस्लिम क्षेत्रों में आतिशबाजी भी हुई।वहीं चौक जामा मस्जिद से एक पत्र भी जारी किया गया था जिसमें चांद दिखाई देने और बृहस्पतिवार से पहला रोज़ा होने की बात कही गई थी।लेकिन अचानक से दूसरा पत्र आया जिसमें चांद न होने की बात कही गई।यहीं से चांद दिखाई देने का मसला फंस गया।हां और ना से लोगों में उहापोह की स्थिति बनी रहीं लोग एक दूसरे को फोन कर जानकारी लेने के चक्कर में देर रात तक सड़कों और गलियों की खाक छानते रहे।लगभग बारह बजे के आस पास शहर क़ाज़ी की तरफ से चांद दिखाई देने का ऐलान किया गया।इस कारण काफी संख्या में जहां तरावीह की नमाज़ का इन्तेज़ाम किया गया था वहां से लोग मायूस लौटे तो वहीं कुछ जगहों पर तरावीह की विशेष नमाज़ अदा की गई।वहीं लखनऊ से शिया मरकज़ी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी का चांद दिखाई देने का पत्र शोशल मीडिया पर आगया तो चक शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना सैय्यद हसन रज़ा ज़ैदी व मस्जिद क़ाज़ी साहब बख्शी बाजार के पेश इमाम मौलाना सैय्यद जव्वादुल हैदर रिज़वी ने भी चांद दिखाई देने की पुष्टि कर दी।इस प्रकार लोगों में चांद होने और न होने का जो भ्रम फैला था उसका पटाक्षेप हुआ। और बृहस्पतिवार को सभी ने सुबहा सहरी खा कर पहले रोज़े की नियत की और फजिर की नमाज़ अदा की। मौसम सर्द रहने के कारण रोज़ादारों को प्यास का एहसास भी नहीं हुआ।पंच वक़ता नमाज़ अदा करने के साथ साथ पुरुष जहां अपने रोज़ी रोटी के बंदोबस्त में लग गए तो वहीं महिलाओं ने घर में रहकर नमाज़ अदा करने के साथ क़ुरआन मजीद की तिलावत की तो वहीं शाम होते ही इफ़्तारी की तैयारी में लग गई। चना, मटर, आलू टिक्की, सैंडविच, दही बड़ा, पकौड़ी, पापड़ आदी को तय्यार किया गया।तो बाज़ार से आए फल और खजूर को भी दस्तरख्वान पर सजाया गया।तो वहीं मस्जिदों व आस पड़ोस के घरों में इफ़्तारी पहुंचाई गई।रोज़ा खोलने और मग़रिब की नमाज़ अदा करने के बाद लोगों ने ईशा के वक्त फिर से मस्जिद का रुख किया और माहे रमज़ान में सुन्नी समुदाय द्वारा पढ़ी जाने वाली विशेष नमाज़ तरावीह अदा किया।
मस्जिदों में दिन भर चला तिलावत ए कलाम पाक का दौर
माहे मुक़द्दस रमज़ान में जहां दोज़ख के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं वहीं एक अच्छे आमाल के लिए बारगाहे खुदावन्दी अपने बन्दों को सत्तर गुना इस का सवाब देता है ।यही वजहा है कि जहां लोग तरहां तरहां की नेकियां कमाने के लिए रोज़ा नमाज़ ज़कात आदि करते हैं वहीं क़ुरआन मजीद की तिलावत भी कसरत से करते हैं। मस्जिद बीबी खदीजा करैली में ओलमा की सरपरस्ती में सामूहिक तिलावत ए कलाम ए पाक माहे रमज़ान की पहली से हो गई।जो माहे रमज़ान के प्रत्येक दिन होगी। मस्जिद बीबी खदीजा के मुतावल्ली हसन आमिर ने बताया की मस्जिद में नमाज़ियों और रोजेदारों के लिए जानमाज़ वज़ू के पानी सजदागाह तस्बीह आदि का मुकम्मल इन्तेज़ाम किया गया है वहीं रोज़ादारों के लिए इफ़्तारी की व्यवस्था भी मस्जिद कमेटी ने की है।

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