राम वन गमन की कथा सुन भावुक हुए श्रोता

प्रतापगढ़: अचलपुर कैरियर एकेडमी में आयोजित संगीतमयी राम कथा के पांचवें दिन कथा वाचक मुक्तामणि शास्त्री ने भगवान श्रीराम के वन गमन का मार्मिक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि अयोध्या नरेश दशरथ, गुरु वशिष्ठ की सलाह से राम के राज्याभिषेक की तैयारियों में जुटे थे। इसी बीच मंथरा ने रानी कैकेयी के मन में भ्रम और द्वेष उत्पन्न कर दिया।
इसके प्रभाव में आकर कैकेयी ने अपने दो वरदान मांगते हुए राम को 14 वर्ष का वनवास और भरत को अयोध्या का राजा बनाने की इच्छा जताई। यह सुनकर राजा दशरथ अत्यंत दुखी हो गए। जब भगवान श्रीराम को इस निर्णय की जानकारी हुई तो उन्होंने माता-पिता की आज्ञा का पालन करते हुए सहज भाव से वन जाने का निर्णय लिया।
लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने के लिए अडिग रहे। अंततः माता सुमित्रा की अनुमति के बाद श्रीराम उन्हें साथ ले जाने को तैयार हुए। वहीं माता सीता ने भी पति धर्म निभाते हुए वन गमन का संकल्प लिया।
इस भावपूर्ण कथा को सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे। कार्यक्रम में विभांशु पांडेय, अनमोल, पोरस, शैल पांडेय, सिया, दिशा और प्रीति पांडेय सहित कई लोग उपस्थित रहे।
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