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JHANSI NEWS: बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार (सुखदेव साहा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले) मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करते हुए “आपात स्थिति में मानसिक स्वास्थ्य प्राथमिक चिकित्सा” विषय पर एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यक्रम युथ चर्चा और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में जनसंचार विभाग की मल्टीमीडिया लैब में संपन्न हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना और युवाओं को मानसिक प्राथमिक चिकित्सा के बारे में शिक्षित करना था। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. सुनेना सूद रहीं, जो एक प्रतिष्ठित मनोचिकित्सक हैं। उनके साथ डॉ. अर्जित गौरव श्रीवास्तव (मनोचिकित्सक) और इस्मिता जायसवाल मैडम (बीकेडी, मनोवैज्ञानिक) ने भी विचार साझा किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर मेजर सुनील काबिया ने की। उन्होंने कहा कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों और नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है, और इससे छात्रों के लिए एक बेहतर शिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होगा। गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में डॉ. सोमा अनिल मिश्रा, डॉ. सिमरन श्रीवास्तव, डॉ. अंजलि सक्सेना और डॉ. नईम सर उपस्थित रहे, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम का संचालन भी किया।
युथ चर्चा के संस्थापक श्री यश चौरसिया तथा सह-संस्थापक श्री गौरव की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष रूप से प्रेरणादायक बनाया।
छात्रों निमी, सोनिका, झलक, सागर, आयुषी, श्रुति, स्वप्निल, सतेंद्र, धनंजय, सूर्यांश आदि ने मानसिक स्वास्थ्य पर अपने विचार प्रस्तुत किए और सक्रिय भागीदारी निभाई। इस अवसर पर छात्रों के एक समूह ने मानसिक स्वास्थ्य विषय पर एक नाट्य प्रस्तुति (स्किट) भी दी, जिसने दर्शकों को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया और विषय की गंभीरता को रेखांकित किया। इसके अतिरिक्त, कुछ छात्रों ने मंच पर आकर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े अपने अनुभव और विचार भी साझा किए, जिससे कार्यक्रम और अधिक प्रभावशाली बन गया। इस आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। समाज में इसके प्रति संवेदनशीलता और संवाद की आवश्यकता है ताकि मानसिक संकट की स्थिति में समय पर सहायता उपलब्ध हो सके।