Physical Address
Pratahkal Express Newspaper
79A-Moti Lal Nehru Road Prayagraj
Opp Women’s Hostel Allahabad University

स्वयंसेवकों ने शस्त्र पूजन कर मनाया विजयादशमी उत्सव, निकाला पथ संचलन
PRATAPGARH NEWS: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने स्थापना के 100 वर्ष की यात्रा में समाज को परिष्कृत करने के लिए विविध प्रकार के उपक्रम किये। वास्तव में हिमालय के उत्तर में बसा हुआ यह राष्ट्र पूरे विश्व को शैक्षिक दृष्टि से एवं आध्यात्मिक दृष्टि से तथा तकनीकी दृष्टि से प्राचीन काल से ही दिशा देने का काम करता रहा है। उक्त विचार नगर के अर्जुन बस्ती में संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आरएसएस द्वारा आयोजित श्री विजयादशमी उत्सव के मौके पर बतौर मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष ने कहा। उन्होंने आगे कहा कि यही नहीं हिंदुस्तान का वैदिक कालीन विचार व इसके पूर्व के कॉल खंडो में भी ऋषियों ने मुनियों ने देशकाल परिस्थित के अनुसार राष्ट्र की उन्नति में अग्रणी भूमिका निभाई है। आज पूरी दुनिया में जहां भी हिंदू समाज व भारतीय लोग निवास करते हैं। संघ का शताब्दी वर्ष हिंदुओं की एकजुटता की गांठ को मजबूत करने के लिए एक उत्सव के रूप में मना रहे हैं। किसी समय में भारत पूरी दुनिया का गुरु था। भारत ने ही पूरे विश्व को शून्य और रेखा गणित देकर समृद्ध किया। सुभाष ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संकल्पना का एकमात्र उद्देश्य मानव मात्र का कल्याण रहा है। विगत के कॉल खंडो में हिंदू समाज विभिन्न जातियों में बिखरा हुआ था,जिसका कारण था कि हमारा देश हजारों वर्ष तक पराधीनता की वेड़ियो में जकड़ा रहा। इन्हीं कारणों से डॉक्टर हेडगेवार जी ने संघ की शाखा चलाने का निर्णय लिया। जिसका उद्देश्य था भारतीय संस्कृति के अनुसार एवं भारतीय वातावरण के अनुसार व्यक्ति का निर्माण हो सके तभी देश और राष्ट्र की उन्नति संभव है। उन्होंने कहा कि भगवान राम की विजय धर्म की विजय थी। भगवान राम की विजय सत्य की विजय थी और संगठित शक्ति की विजय थी। भगवान राम की सेना में एक अच्छा नियोजन था जिसके कारण रावण का संघार किया। डॉक्टर हेडगेवार ने इतिहास का अवलोकन किया था और उन्होंने यह सोचा कि देश कभी पराधीन ना हो इसलिए हमें हिंदू समाज के संगठन की आवश्यकता है यही कारण है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई। संघ का उद्देश्य है धर्म की जय हो यानी भारत के रहने वाले लोग धर्म के अनुसार अपनी संस्कृति के अनुसार अपना आचरण करेंगे और आलस्य को त्याग कर ,सत्य के मार्ग पर चलना और सब के हित का चिंतन करना तभी विश्व का कल्याण हो सकता है। सर्वे भवंतु सुखिना की भावना सभी के मन मस्तिष्क में होनी चाहिए। इसलिए हमें व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की तरफ बढ़ना चाहिए तभी हम भारत के वैभव को स्थापित कर सकते हैं। शताब्दी वर्ष में नागरिक कर्तव्य, कुटुंब प्रबोधन ,सामाजिक समरसता ,पर्यावरण तथा स्व का जागरण जैसे विषयों को लेकर हमे समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में काम करने का संकल्प लेना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर महेंद्र मिश्रा ने किया। इसके अतिथियों द्वारा शस्त्र पूजन किया गया।इस दौरान विभाग कार्यवाह हरीश उपस्थित रहे। तदुपरांत एकत्रित स्वयंसेवकों ने शांति एवं उत्साह से पथ संचलन निकाला, जहां नगर वासियों ने पथ संचलन कर रहे स्वयंसेवकों पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस मौके पर जिला कार्यवाह हेमंत कुमार,विभाग प्रचार प्रमुख प्रभा शंकर पांडेय,जिला प्रचार प्रमुख अंकुर श्रीवास्तव,नगर कार्यवाह अंकित, सुमित,अभिषेक,राजाजी,सतीश, राघवेंद्र सिंह,सदर विधायक राजेंद्र मौर्य,पूर्व विधायक बृजेश सौरभ, राजेश जायसवाल,दिनेश, जिला कार्यवाहिका का प्रिया त्रिपाठी, विभा शुक्ला, काजलशिल्पकार, राजजी, धीरज,अनुराग मिश्रा,आशीष शुक्ला विजय,ओमप्रकाश सहित आदि रहे।