भगवान श्रीकृष्ण की उपासना से मिलता है धर्मनीति को संबल:आचार्य देवव्रत जी

टोड़ी का पुरवा नौढ़िया में कथा विश्राम दिवस पर उमड़े श्रद्धालु

PRATAPGARH NEWS: टोड़ी का पुरवा नौढ़िया में हो रही श्रीमदभागवत कथा के विश्राम दिवस बुधवार को परीक्षित मोक्ष का भावपूर्ण प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथाव्यास आचार्य देवव्रत जी महराज ने कहा कि भगवान की लीला संसार को नैतिक सन्मार्ग के जीवन की प्रेरणा दिया करती है। उन्होने कहा कि धर्म के प्रति सच्चा अनुराग जीव को कभी भी विचलित मार्ग का कष्ट नहीं प्रदान किया करता। उन्होने कहा कि परीक्षित को यह ज्ञान हो गया कि सृष्टि में भगवान ही जीव के मोक्षदाता है। आचार्य देवव्रत जी ने कहा कि परीक्षित मोक्ष से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए कि संसार में धन, वैभव, ऐश्वर्य का कभी भी घमण्ड नहीं करना चाहिए। उन्होने कहा कि सुखी वही है जो निश्छल भाव से परमात्मा का अनुरागी और अनुशरण करने वाला होता है। उन्होने कहा कि श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण नीति की उपासना के सदैव प्रेरक हैं। कथाव्यास जी ने बताया कि कलिकाल में हरिनाम का संकीर्तन और भगवान की कथा का सत्संग ही जीवन को कष्टमुक्त बना सकता है। आचार्य देवव्रत जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन में सुचरित्रता तथा परोपकार के भाव के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देने का आदर्श ग्रन्थ है। उन्होने श्रद्धालुओं से कहा कि कथा को आत्मसात करने के लिए सदैव अन्तःकरण को भी शुद्ध रखना चाहिए। कथा के दौरान विश्राम दिवस पर भगवान द्वारिकाधीश की अर्चना को लेकर मनमोहक भजनों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध दिखे। कथा में श्रीरामचरितमानस राष्ट्रीय ग्रन्थ संरक्षा अभियान समिति के संयोजक ज्ञानप्रकाश शुक्ल एवं अधिवक्ता अनिल त्रिपाठी महेश, डा0 नीरज शुक्ला, अधिवक्ता मनुज कुमार शुक्ल ने कथावाचक संस्कृत विद्वान आचार्य देवव्रत जी महराज को तुलसी सम्मान से सम्मानित किया। कार्यक्रम के संयोजक प्रधान उज्ज्वल शुक्ला व पूनम शुक्ला ने व्यासपीठ का पूजन अर्चन किया। इस मौके पर चेयरपर्सन प्रतिनिधि संतोष द्विवेदी, ज्ञानानंद शुक्ल, सरोज शुक्ला, अजिता, दीक्षा, अंकुर शुक्ला, मोनू पाण्डेय, विमल जी महराज, लव त्रिपाठी, रामसजीवन तिवारी, राजू द्विवेदी आदि मौजूद रहे।

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