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SIDHARTHNAGAR NEWS: 1857 की पहली आज़ादी की लड़ाई के महानायक और स्वतंत्र भारत के स्वप्नदृष्टा सम्राट बहादुर शाह ज़फर की 251वीं जयंती के अवसर पर शुक्रवार को तहसील शोहरतगढ़ परिसर में श्रद्धा और सम्मान के साथ कार्यक्रम आयोजित हुआ। मौलाना अब्दुल कयूम रहमानी फाउंडेशन के अध्यक्ष बदरे आलम के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोगों ने एकजुट होकर प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी विवेकानंद मिश्रा को सौंपा।
ज्ञापन में मांग की गई कि बहादुर शाह ज़फर की अंतिम इच्छा के अनुरूप उनके पार्थिव अवशेषों को म्यांमार (यंगून) से भारत लाकर दिल्ली में भव्य राष्ट्रीय स्मारक के रूप में स्थापित किया जाए। साथ ही लाल किले पर उनकी भव्य प्रतिमा लगाई जाए और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम बहादुर शाह ज़फर के नाम पर किया जाए। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि उनके अदम्य साहस, त्याग और बलिदान को विद्यालयों की पाठ्य पुस्तकों में शामिल किया जाए, ताकि नई पीढ़ी आज़ादी के उस इतिहास को जान सके जिसमें बहादुर शाह ज़फर का योगदान अमर है। इस अवसर पर बदरे आलम ने कहा कि बहादुर शाह ज़फर केवल एक शासक नहीं, बल्कि आज़ादी के आंदोलन की प्रेरणा थे। देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ. मनमोहन सिंह और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सहित कई गणमान्य नेता म्यांमार यात्रा के दौरान उनके मजार पर श्रद्धांजलि अर्पित कर चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी म्यांमार यात्रा के दौरान उन्हें नमन किया था। उन्होंने बताया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 1943 में बहादुर शाह ज़फर के मजार पर जाकर ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया था और मजार की देखरेख के लिए 50 हजार रुपये का दान किया था। कार्यक्रम के अंत में बदरे आलम ने 1857 की क्रांति और बहादुर शाह ज़फर के जीवन पर आधारित पुस्तक उप जिलाधिकारी विवेकानंद मिश्रा को भेंट की। इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष काज़ी सुहेल अहमद, कैलाशनाथ बाजपेयी, दीपक यदुवंशी, अतहर अलीम, राममिलन भारती, दीपक राजभर, श्यामलाल शर्मा, हरिराम यादव, अनिरुद्ध पाठक, मोहम्मद असलम, सनाउल्लाह, अकबर अली, हाफिज एजाज अहमद, सबरे आलम, तारिक शानी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।