नारा-ए-हैदरी से मुनाफिकों को होने लगता है घबराहट:मौलाना अबरार हुसैन वारसी

जश्ने-ए-वारिस पाक में गूंजा “या अली, या हुसैन” का नारा

MIRZAPUR NEWS : (शाहिद वारसी) बुधवार की देर रात वारसी कौमी एकता कमेटी कंतित मीरजापुर की तरफ़ से जश्ने-ए-वारिस पाक का शानदार एहतमाम किया गया। सूफी सैय्यद हाजी वारिस अली शाह रहमतुल्लाह अलैह की याद में सजाई गई महफिल में लंगर-ए-आम का भी इंतज़ाम था। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक ने इस रूहानी जलसे में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जब महफ़िल का आग़ाज़ हुआ तो छोटा मीरजापुर के रहने वाले नौजवान नातख़्वां मोहम्मद आदिल वारसी ने ईमाम-ए-हुसैन अलैहिस्सलाम की शान में अपनी मधुर आवाज़ से महफ़िल को झूमने पर मजबूर कर दिया। जब उन्होंने पढ़ा कि “नहीं है हमें कोई डर हुसैन बैठे हैं,हमारे सीने के अंदर हुसैन बैठे हैं,वो एक नाम जो नबियों में सबसे ऊपर है,उन्हीं के पुश्त के ऊपर हुसैन बैठे हैं। तो महफ़िल का माहौल झूम उठा। या हुसैन के नारों से पूरा इलाक़ा गूंज उठा। हर दिल में इश्क़-ए-हुसैन की लहर दौड़ गई।इसके बाद नातख़्वां मोहम्मद फरहान ने जब ये शेर पढ़ा कि ताज़ीम-ए-अली शर्त है हर इल्म से पहले, ऐ लोगों किताबों से विलायत नहीं मिलती, सजदे में रहें चाहे वो जाए हरम में, सादात के गद्दारों को जन्नत नहीं मिलती। मौजूद लोगों ने खड़े होकर दाद देने लगे। जब सूफ़ी मौलाना अबरार हुसैन वारसी साहब की खिताबत का वक़्त आया, तो लोग बेचैनी से उनका इंतज़ार करने लगे। मौलाना अबरार वारसी साहब ने अपने दिलकश अंदाज़ में फ़रमाया कि असदुल्लाह-ए-ग़ालिब, मौला अली इब्न अबी तालिब अलैहिस्सलाम हलालज़ादों के इमाम हैं, हरामज़ादों के नहीं।अली का इश्क़ इमान की निशानी है और अली की विलायत जन्नत की कुंजी है। लोग कहते हैं कि अली से इश्क़ करोगे तो राफ़्ज़ी हो जाओगे । अगर अली से मोहब्बत करना राफ़्ज़ी की पहचान है तो मैं भी राफ़्ज़ी हूँ अगर अली से वफ़ादारी शियत है,तो मैं भी शिया हूँ और अगर अली का नाम लेना गुनाह है तो मैं  ऐसी गुनाह पर कुर्बान हूँ।इसके आगे मौलाना ने कहां कि रसूल-ए-ख़ुदा ने फ़रमाया-‘अना मदीनतुल इल्म, वा अलीय्युन बाबुहा।’यानी मैं शहर-ए-इल्म हूँ और अली उसके दरवाज़ा हैं। जो अली से मुंह मोड़ेगा, वो इल्म से, ईमान से, हक़ से कट जाएगा। ए लोगों याद रखो — जहाँ अली हैं, वहाँ मोहब्बत है। जहाँ अली नहीं, वहाँ जहालत है।मौलाना ने आगे कहा कि हज़रत वारिस अली शाह रहमतुल्लाह अलैह, ईमाम-ए-हुसैन अलैहिस्सलाम की 26वीं पुश्त से हैं। उन्होंने हमेशा मोहब्बत, अमन और इंसानियत का पैग़ाम दिया। इस खुशनुमा महफिल में सरकार आलमपनाह के एहरामपोश व कमेटी के सभी सदस्य मौजूद रहे।

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