राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई गई लोहपुरुष सरदार पटेल की 150वीं जयंती

KAUSHAMBI NEWS: प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर में शुक्रवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं  जयंती मनाई गई। शिक्षकों ने वल्लभ भाई पटेल जी के तस्वीर पर फूल मालाएं अर्पण करने के पश्चात बच्चो को जानकारी दी  की  वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को  गुजरात के पेटलाद तालुके के करमसद  गांव में  हुआ था।उनके पिता का नाम झबेर भाई  पटेल और माता का नाम लाडबाई था। मुबई की एक सभा में सिंह की तरह गर्जना  करते हुए कहा था कि अंग्रेज भारत को जितनी जल्दी आजाद कर दे उतना ही अच्छा होगा। यदि देरी की गई तो यह उन्ही के लिए खराब बात होगी।सरदार पटेल ने इस विकट समस्या को अपनी  दृढ़ता और सूझबूझ से हल कर दिखाया और लगभग छः सौ  रियासतों का  भारतीय संघ का अटूट अंग बनाकर भारत का मानचित्र का नवीन स्वरूप  प्रदान किया ।संपूर्ण भारत में एकता स्थापित हो गई।इसलिए उन्हे भारत का लौह पुरुष कहा जाता है।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री तथा प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को समर्पित एक स्मारक है जो गुजरात  प्रांत में स्थित है।15 दिसंबर 1950 को दिल के दौरे से मुंबई में निधन हो  गया।भारत निर्माण में सरदार वल्लभ भाई पटेल के  अविस्मरीय योगदान के  कारण वर्ष 1991  में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनकी  जयंती कार्यक्रम में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बच्चे इस प्रतियोगिता में शामिल हुए।प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चो को इनाम देकर सम्मानित किया गया। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुमन कुशवाहा के निर्देशन में बच्चो ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में विद्यालय की शिक्षिका  शैलजा, मोहिनी शुक्ला, रीता दयाल, प्रदीप सिंह, शिक्षामित्र मीरा दुबे व  गुलशन बाबू शिक्षामित्र, आगनवाड़ी कार्यकत्री अर्चना शुक्ला सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।

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