मित्रता हो तो सुदामा जी जैसा कथा सुनकर श्रोतागण की आँखे भर आयी

श्रीमद्भागवत कथा के सातवे दिन पुर्णाहुति एवं भण्डारा के साथ हुआ समापन
KUSHINAGAR NEWS: स्थानीय नगरपालिका परिषद के वार्ड न 15 वीर सावरकर नगर के निवासी मुख्य यजमान सेवानिवृत्त प्रवक्ता मधुसूदन मिश्र  एवं उनकी धर्मपत्नी नगावली के निज निवास पर चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के सातवे दिन उपस्थित श्रोतागणों को कथावाचक अनुराग कृष्ण शास्त्री ने सुदामा-चरित्र का विस्तारपूर्वक पूर्वक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मित्रता हो तो सुदामा जैसा परन्तु वर्तमान परिवेश में ऐसा बिलकुल नही है। उन्होंने कहा कि आजकल की मित्रता तो स्वार्थ एवं अवसरवादी हो गयी है। उन्होंने कहा कि सुदामा निर्धन ब्राह्मण थे और कृष्ण उनके बाल सखा। सुदामा का चरित्र त्याग का है। उन्होंने कहा कि गरीबी एवं विपन्नता के बाबजूद भी परम संतोषी थे सुदामा जी। सुदामा जी के घर मे क्रांति तब आई जब चार पाँच दिनों तक अन्न के अभाव भोजन नही बना। सुदामा की पत्नी सुशीला ने भूखे बच्चों की तसल्ली के लिये चूल्हे पर देर तक पानी को पकाती थी। उनके दरवाजे पर एक दिन भीख मांगने एक भिक्षु आया उसे सुदामा जी पत्नी ने कहा मेरे घर बिटिया हुई है जिसका दरिद्रा एवं विपन्नता है अतः मैं आपको कुछ दे नही सकती। तब उसने कहा कि सुदामा जी के बाल सखा है द्वारिकाधीश क्यों नही आप उन्हें वहाँ भेज देती है। पत्नी सुशीला के कहने पर अपने बाल सखा से मिलने सुदामा द्वारिका जाते है और वहाँ द्वारपाल से कहते है कि  जाओ द्वारिकाधीश से बता दो कि सुदामा आये है द्वारपाल जाकर कहता है तो कृष्ण दौड़े दौड़े सुदामा से मिलने आते फिर उन्हें गले लगाकर रोने लगते है तथा उन्हें अपने आसन पर बैठकर उनका पाव अपने अश्रुओं की धारा से पखारते है। कृष्ण सुदामा के मिलने की मार्मिक कथा सुन उपस्थिति श्रोतागण के आँखे भर आयी।
तदुपरान्त कथा का समापन तुला दान,हवन एवं भण्डारा के साथ सम्पन्न हुआ
इस दौरान पंडित दिनेश त्रिपाठी, ब्रदीनाथ पांडेय,विधायक हाटा मोहन वर्मा, सपा नेता रणविजय सिंह, डॉ मार्कण्डेय चतुवेर्दी,डॉ अनामिका,डॉ अमित कुमार राय, डॉ उमाशंकर नायक, चतुर्भुज मिश्र,अशोक मिश्र, सुशील मिश्र, सतीश मिश्र, अभय मिश्र, आनन्द मिश्र,आशुतोष मिश्र, अनुपम मिश्र, हिमांशु मिश्र, आरिव मिश्र, रिशुल पांडेय,विराट पांडेय, अंजलि मिश्र, नम्रता मिश्र, डॉ रागिनी मिश्र, मोनिका, स्वाति, प्रियंका, आदि उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *