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150वीं वर्षगांठ पर सरस्वती शिक्षा मंदिर में हुआ भव्य आयोजन
AMETHI NEWS: “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शुक्रवार को सरस्वती शिक्षा मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, ग्रामभारती (परतोष, अमेठी) में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वंदे मातरम् कोई साधारण गीत नहीं, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा और राष्ट्र की पहचान है। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ यह गीत भारतीय जनमानस की आवाज़ बन गया था, जिसने अंग्रेजों की नींद उड़ा दी थी।
वंदे मातरम् का इतिहास
वंदे मातरम् की रचना प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिमचंद्र चटर्जी ने की थी। यह गीत पहली बार 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका ‘बंग दर्शन’ में प्रकाशित हुआ। बाद में इसे उनके अमर उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में शामिल किया गया। अरविंद घोष ने 16 अप्रैल 1907 को अंग्रेजी दैनिक Vande Mataram में लिखा कि बंकिमचंद्र चटर्जी ने यह गीत 32 वर्ष पूर्व रचा था। सन् 1905 में कोलकाता में “वंदे मातरम् संप्रदाय” की स्थापना हुई। प्रत्येक रविवार लोग प्रभात फेरी निकालते हुए “वंदे मातरम्” का गायन करते थे। रवीन्द्रनाथ ठाकुर भी इस आंदोलन से जुड़े थे। वर्ष 1906 में विपिनचंद्र पाल और अरविंद घोष के संपादन में Vande Mataram नामक अख़बार प्रारंभ किया गया, जिसने देश में आत्मनिर्भरता, एकता और स्वतंत्रता की भावना को बल दिया। यह गीत शीघ्र ही ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारतीय एकता का प्रतीक बन गया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत क्रांतिकारियों की शक्ति, प्रेरणा और उत्साह का स्रोत बना। 24 जनवरी 1950 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने “वंदे मातरम्” को राष्ट्रगान के समान दर्जा प्रदान किया।