भागवत से होता है मानव को कर्तव्यबोध : डॉ. पाराशर जी महाराज

PRATAPGARH NEWS: सांगीपुर क्षेत्र के पूरे नेमधर गांव में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा पुराण के तीसरे दिन रविवार को भागवत शिरोमणि डॉ. श्याम सुंदर पाराशर जी महाराज ने कहा कि मनुष्यों का क्या कर्तव्य है इसका बोध भागवत सुनकर ही होता है। विडंबना ये है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं। निस्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले लोग अपना जन्म और मरण दोनों सुधार लेते हैं।  कथा व्यास ने कहा कि प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मान लेता है और अपने शरीर को प्रधान मान लेता है। जबकि शरीर नश्वर है। उन्होंने कहा कि भागवत बताता है कि कर्म ऐसा करो जो निस्काम हो वहीं सच्ची भक्ति है। कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पूरे गांव में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा। कथा आयोजन का संचालन अभिषेक मिश्र द्वारा किया जा रहा है । इस अवसर पर डॉ. सर्वेश कुमार मिश्र, डॉ. प्रणव कुमार मिश्र, प्रवीण कुमार, श्रीश मिश्र, निशा मिश्रा, निरंजना, पूजा आरती सहित कई भक्तगण उपस्थित रहे। कथा स्थल पर भजन-कीर्तन और पूजन-अर्चन से वातावरण भक्तिमय बना रहा। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस ज्ञान महायज्ञ में सहभागी बनने और श्रीमद्भागवत कथा के दिव्य श्रवण का पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की है।

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