जीवन का परम कर्तव्य है भगवान के दिव्य चरित्र का अनुसरण करना

PRATAPGARH NEWS: विकासखंड लक्ष्मणपुर के  कोठार मंगोलपुर सगरा सुन्दरपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। कथा व्यास ओमानंद महाराज ने बताया कि भगवान के अवतार हमें मानव जीवन जीने के आदर्शों की शिक्षा देते हैं।अवतारों के जन्म के समय में भी एक गहन आध्यात्मिक संकेत छिपा है। भगवान श्रीराम का जन्म ठीक दोपहर 12 बजे हुआ, जो प्रकाश, मर्यादा और स्पष्टता का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म ठीक मध्यरात्रि 12 बजे हुआ, जो गहनता, रहस्य और ज्ञान का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि नवमी तिथि का अर्थ है अंक नौ का पूर्ण होना। इसका आध्यात्मिक तात्पर्य है कि जब जीवात्मा उस परमात्मा से मिलती है, तो वह भी पूर्ण और परिपूर्ण हो जाती है। कथा व्यास ने बताया कि प्रत्येक मानव के जीवन का परम और सर्वोपरि कर्तव्य यह है कि वह भगवान के दिव्य चरित्र का अनुसरण करे। भगवान के दैवीय गुणों को अपनाते हुए देवत्व को प्राप्त हो। कथाव्यास ओमानंद ने श्रद्धालुओं से कहा कि पवित्र कथाओं का श्रवण कर उसे आत्मसात करें और अपने भीतर की आसुरी वृत्तियों को जीवन से पूर्णतः निकाल दे।
शुद्ध और चैतन्य भाव को प्राप्त कर हरि की शरण में जाकर जीवन को कृतार्थ करे। मुख्य आयोजक डॉ. हरिश्चंद्र शुक्ल व सरोज शुक्ल ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच व्यासपीठ का पूजन किया। इस मौके विश्वम्भर नाथ शुक्ल, राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, उमेश शुक्ल, प्रतीक शुक्ल, शिवशंकर, रत्नाकर तिवारी, संजय शुक्ल आदि मौजूद रहे।

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