नरौली में जश्न-ए-गौसुल वरा की रौनक, हज़रत मौलाना आमिर मियां सफ़वी ने दिया अमन-ओ-भाईचारे का पैग़ाम

अकीदतमंदों ने मौलाना से दिन और ईमान के ताल्लुक से सुनी  तकरीर, अमल करने का करा अहद
FATEHPUR NEWS: नरौली जामा मस्जिद के पास बड़े ही अकीदतमंदाना और रूहानियत से भरे माहौल में “जश्न-ए-गौसुल वरा” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर दूर-दराज़ से आए उलेमा-ए-किराम, हाफ़िज़, क़ारी और अकीदतमंदों की बड़ी तादाद ने शिरकत की। पूरे इलाके में रातभर “या गौसे पाक! या गौस अलमदद” के नारों से फिज़ा गूंजती रही। कार्यक्रम की रौनक उस वक्त बढ़ गई जब पुरखास शरीफ से हज़रत मौलाना आमिर मियां सफ़वी मिसबाही साहब तशरीफ़ लाए। उन्होंने अपने बयान में गौसे पाक की जिंदगी और उनके करामाती वाक़ियात पर रौशनी डालते हुए कहा कि औलिया-ए-किराम ने हमेशा मोहब्बत, अमन और इंसानियत का पैग़ाम दिया है। आज ज़रूरत इस बात की है कि हम सब मिलकर हिंदू-मुस्लिम एकता को मज़बूत करें ताकि मुल्क मज़बूत बने और समाज में अमन-ओ-सुकून कायम रहे। उन्होंने यह भी कहा कि गौसे आज़म (रह.) की तालीमात इंसान को खुदा की बंदगी और इंसानियत की खिदमत सिखाती है। महफ़िल में नात-ए-पाक और हम्द-ओ-सना का सिलसिला भी जारी रहा। हाफ़िज़ शमशाद मुवारी, शहनवाज़ साहब (इलाहाबाद), समी़र (खागा), हाफ़िज़ अब्दुर्रहमान सहित कई नातख़्वानों ने अपने शानदार आवाज़ में गौसे पाक की शान में नात पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया। मुस्लिम समाज के लोग बड़ी तादाद में शामिल हुए और दरूद-ओ-सलाम की सदाओं से पूरा इलाका गूंज उठा। कार्यक्रम के आखिर में मुल्क में अमन, सलामती और भाईचारे की दुआ मांगी गई। “गौसे पाक के नाम पर एकता और इंसानियत का यह पैग़ाम हर दिल में उतर जाए — यही जश्न-ए-गौसुल वरा की असल रूह है। इस दौरान नरौली जामा मस्जिद के इमाम हाफ़िज़ अब्दुर्रहमान और ग्राम प्रधान मोहम्मद अल्ताफ़, अनवारूल भाई, राजा के साथ ही अन्य लोग मौजूद रहे हैं।

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