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LAKHIMPUR KHERI NEWS: 17 नवंबर को विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत सोमवार को कलेक्ट्रेट स्थित अटल सभागार में डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल की अध्यक्षता में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों की बैठक आयोजित हुई। बैठक का संचालन एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने किया। बैठक में डीएम ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम के अनुसार 04 नवंबर से 04 दिसंबर तक बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करेंगे और मतदाताओं से भरे हुए प्रपत्र वापस प्राप्त करेंगे। गणना प्रपत्र के प्रथम भाग में मतदाता का नाम, एपिक संख्या, भाग संख्या, क्रम संख्या, विधानसभा क्षेत्र का नाम व फोटो पहले से ही अंकित रहेगा। उन्होंने बताया कि मतदाता अपने और अपने परिजनों का वर्ष 2003 की मतदाता सूची का रिकॉर्ड भारत निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर देख सकते हैं। जो मतदाता गणना प्रपत्र भरकर बीएलओ को लौटाएंगे, उनके नाम आलेख्य निर्वाचक नामावली में शामिल किए जाएंगे। बीएलओ द्वारा एक प्रतिलिपि अपने पास सुरक्षित रखी जाएगी, जबकि दूसरी पर हस्ताक्षर कर मतदाता को पावती दी जाएगी। एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि कि वर्ष 1951 से 2004 तक कुल आठ बार विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण हो चुका है। प्रदेश में अंतिम पुनरीक्षण वर्ष 2003 में हुआ था। प्रवासन, मृतकों के नाम हटाने में त्रुटि, एक व्यक्ति का नाम विभिन्न स्थानों पर दर्ज होना तथा विदेशी नागरिकों के नाम गलती से शामिल होने जैसी स्थितियों को सुधारने के लिए यह पुनरीक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मतदेय स्थलों के सम्भाजन पर सर्वसम्मति, चुनाव आयोग को भेजा जाएगा प्रस्ताव
एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार इस अवधि में मतदेय स्थलों का सम्भाजन भी कराया जा रहा है। इसके तहत 18 नवंबर तक सभी मतदेय स्थलों को अंतिम रूप देना है। इसके बाद 19, 20 और 21 नवंबर को प्रस्ताव मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उप्र लखनऊ को भेजा जाएगा। तत्पश्चात 24 नवंबर को संपूर्ण प्रस्ताव भारत निर्वाचन आयोग को प्रेषित किया जाएगा।
बैठक में बताया कि 10 नवंबर को प्रकाशित मतदेय स्थलों की सूची सभी दलों को उपलब्ध करा दी गई थी। इसके बावजूद किसी भी दल द्वारा कोई आपत्ति या सुझाव लिखित रूप में नहीं दिया गया। अधिकारियों ने पुनः स्पष्ट किया कि यदि किसी दल को कोई सुझाव या आपत्ति हो तो तत्काल उपलब्ध कराएं, ताकि 19 नवंबर को अंतिम सूची मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपी जा सके। हालांकि बैठक में उपस्थित किसी भी दल के प्रतिनिधि ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं की। सभी ने प्रस्तावित सूची पर सहमति जताते हुए इसे निर्वाचन आयोग को भेजने की अनुमति प्रदान कर दी।