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छात्रों में जिज्ञासा,खोज की भावना प्रोत्साहित करना जरूरी:सुष्मिता कानूनगो
PRAYAGRAJ NEWS: सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी, गंगानाथ झा कैंपस, प्रयागराज के सहयोग से जगत तारण गोल्डन जुबली स्कूल में “भारतीय ज्ञान परंपरा का परिचय” विषय पर सेमिनार का आयोजन आज सभागार में किया गया। इस अवसर पर प्रो देवदत्त सारोड़े एवं प्रो प्रशांत प्रभाकर होले ने संस्कृत भाषा के गहन सांस्कृतिक एवं बौद्धिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्कृत केवल भारत की प्राचीन भाषा ही नहीं है, बल्कि ज्ञान के विशाल भंडार की आधारभूत भाषा भी है। पाणिनि की अष्टाध्यायी द्वारा निर्धारित संस्कृत की सूक्ष्म और वैज्ञानिक संरचना ने इसे सहस्रों वर्षों से धार्मिक ग्रंथों, साहित्य, दर्शन, विज्ञान तथा गणित का प्रमुख माध्यम बनाए रखा है।
सेमिनार में यह भी स्पष्ट हुआ कि प्राचीन काल में संस्कृत के माध्यम से जटिल वैज्ञानिक अवधारणाएँ, गणितीय सिद्धांत, खगोल विज्ञान और तर्कशास्त्र जैसी विषय-वस्तुएँ व्यवस्थित रूप से संरक्षित की गईं, जिसने भारत की समृद्ध वैचारिक परंपरा को आकार दिया। यह समझ आधुनिक शिक्षा में एक समग्र दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करती है, जहाँ पारंपरिक ज्ञान आधुनिक विषयों को पूर्ण करता है। विधालय की प्रधानाचार्या सुष्मिता कानूनगो ने कहा कि आज के विद्यार्थियों में जिज्ञासा और खोज की भावना को प्रोत्साहित करना एक उज्जवल भविष्य के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है। उनका विश्वास है कि इस प्रकार के सेमिनार विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध विरासत से जुड़ने का अवसर देते हैं और उन्हें एक संतुलित, जागरूक तथा प्रबुद्ध पीढ़ी बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं। प्रधानाचार्या सुस्मिता कानुगो ने अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। आइडियल होम्योपैथिक वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन ( आई.एच. डब्लू. ओ.) की एक वैज्ञानिक संगोष्ठी होटल सुखधाम रामबाग प्रयागराज में आयोजित की गई। मुख्य वक्ता डॉ राजेश श्रीवास्तव ने सर्दी के मौसम में होने वाली इनफेक्शियस डिजीज पर चर्चा की सर्दियों के मौसम में संक्रामक रोगों की संभावना काफी बढ़ जाती है, क्योंकि ठंड के कारण लोग अधिकतर समय बंद और भीड़भाड़ वाली जगहों में रहते हैं, जिससे वायरस और बैक्टीरिया का प्रसार तेजी से होता है। इस दौरान फ्लू, सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में संक्रमण, आरएसवी तथा निमोनिया जैसे रोग आम तौर पर देखने को मिलते हैं। ठंडी और शुष्क हवा नाक और गले की श्लेष्मिक झिल्ली को सुखा देती है, जिससे शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और सूक्ष्मजीव आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में ये रोग अधिक गंभीर रूप ले सकते हैं। सर्दियों में कम धूप मिलने के कारण विटामिन-क् की कमी भी प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव डालती है। इसलिए इस मौसम में स्वच्छता बनाए रखना, पोषक आहार लेना, पर्याप्त पानी पीना और भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचना आवश्यक है ताकि संक्रमणों से सुरक्षा बनी रहे। आगामी 10 व 11 जनवरी 2026 को आगरा में आइडियल होम्योपैथिक वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के तत्वावधान में होने वाली द्वितीय अखिल भारतीय होम्योपैथिक मेडिकल कांग्रेस कार्यक्रम को पूर्ण रूप से सफल बनाने हेतु रूप रेखा भी तैयार की गई। राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ भंवर सिंह ने समस्त आगन्तुक चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त किया । संगोष्ठी का समापन राष्ट्रगान के द्वारा किया गया। संगोष्ठी मे मुख्य रूप से डॉ अखिल निगम, डॉ सुनील कुमार पटेल, डॉ अशोक गुप्ता, डॉ भगवान केसरी, डॉ कपूर केसरवानी, डॉ विकास यादव, डॉ सुमित, डॉ सन्तोष यादव, गुलाब सिंह आदि शामिल रहे।