धान का पुआल जलाने से नष्ट होती है भूमि की उर्वराशक्ति

पुआल जलाने से नष्ट हो जाते है लाभकारी जीवाणु, ट्राइकोडर्मा फफूंद
KUSHINAGAR NEWS: धान काटने के बाद फसल अवशेष जो खेत मे रह जाता है उसे पुआल कहते हैं। फसल अवशेष को जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती हैं। नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश तथा सल्फर के रूप में अति उपयोगी तत्व जलकर नष्ट हो जाते हैं। एक ग्राम मिट्टी में 10 करोड़ से अधिक लाभकारी जीवाणु, लाखो लाभकारी फफूँद जलकर नष्ट हो जाते हैं। दस कुन्तल पुआल जलाने से 12 किग्रा. यूरिया, 7 किग्रा. फास्फोरस तथा 25 किग्रा पोटाश, 1.2 किग्रा सल्फर, 400 किग्रा कार्बन का नुकसान होता है। पुआल जलाने से यह तत्व नष्ट हो जाते हैं यह जानकारी उ० प्र० गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केन्द्र- पिपराइच गोरखपुर के पूर्व सहायक निदेशक व गन्ना विशेषज्ञ ओम प्रकाश गुप्ता ने कसया विकास खण्ड के ग्राम बरवा में किसानो को दी। बैठक में उपस्थित प्रगतिशील किमान दरोगा सिंह, अवधेश कुशवाहा, मैनेजर सिंह, नत्थू गुप्ता ने पूछा कि फसलो के अवशेष पुआल जलाने से क्या क्या नुकसान होता है? इस सवाल के जवाब में पूर्व सहायक निदेशक ओम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि सबसे लाभकारी फफूंद ट्राईकोडर्मा जलकर नष्ट हो जाता है। आज सभी किसानो को ट्राइकोडर्मा प्रयोग करने को कहा जा रहा, जिससे उकठा रोग बढ़ रहा है। जैविक उर्वरक राइजोबियम, फास्‌फोरस घुलनशील जीवाणु एजोस्पाईरिलम, एजोटोबैक्टर, ब्लू ग्रीन एलगी जो भूमि में नाईट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं, सब जलकर नष्ट हो जाते हैं। जैविक कीटनाशी बवेरिया वेसियाना व किसान का मित्र केचुआ, मेंढक भी पुआल जलाने से प्रभावित हो रहे हैं। मिट्टी बीमार हो रही है। पूर्व सहायक निदेशक ने कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या, पंतनगर, कानपुर तथा हैदराबाद, कोयम्बटूर, करनाल, पुणे तथा केन्द्रीय धान अनुसंधान संस्थान कटक उड़ीसा, कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में जाकर कृषि वैज्ञानिकों से जानकारी ली है। पुआल जलाने से हमारा पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। 10 कुन्तल धान का पुआल जलाने से 60 किग्रा कार्बन मोनो ऑक्साइड, 4 किग्रा नाइट्रस ऑक्साइड, 1460 किग्रा कार्बन डाई ऑक्साइड, 0.2 किग्रा सल्फर डाइऑक्साइड विषैली गैस उत्सर्जित होती है। उदाहरण के लिए पंजाब हरियाणा में धान का पुआल-पराली जलाने से दिल्ली का पर्यावरण प्रदूषण हो रहा है। सभी किसान भाइयों से अनुरोध है कि धान का पुआल न जलाए। 20 किलोग्राम प्रति एकड़ यूरिया प्रयोग कर गहरी जुताई करें सड़कर जैविक खाद बन जाएगा। मृदा की रासायनिक तथा भौतिक गुणों में सुधार होगा धान के पुआल में 0.36 प्रतिशत मात्रा नत्रजन, 0.08 प्रतिशत फास्फोरस तथा 0.7% पोटाश पाया जाता है। 1 एकड़ धान का पुआल जलाने से 400 किलोग्राम लाभकारी कार्बन जलकर नष्ट हो जाता है। अवशेष जलाने से फसलों की उत्पादन लागत बढ़ रही है। कीट व रोगों का प्रकोप बढ़ रहा है, किसान परेशान हैं। पुनः अपील है कि अवशेष ना जलाएं।

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