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नई दिल्ली(पीएमए)भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भाजपा के हैंडल से कहा गया कि राहुल गांधी संसद में झूठ बोलते हैं। इसके साथ ही पार्टी ने ‘एक्स’ पर संसद में राहुल गांधी के संबोधन का एक वीडियो भी शेयर किया है। भाजपा ने कहा कि चुनाव आयुक्तों का चयन मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता वाली समिति द्वारा किया जाता था। क्या राहुल गांधी कांग्रेस सरकार के दौरान किसी ऐसे चुनाव आयुक्त का नाम बता सकते हैं, जिसे मुख्य न्यायाधीश या विपक्ष के नेता वाली समिति द्वारा चुना गया हो? भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि यह समिति नए कानून बनने तक अस्थायी रूप से बनाई गई थी। कांग्रेस के प्रधानमंत्री अब तक चुनाव आयुक्तों की सीधे नियुक्ति करते रहे हैं। क्या राहुल गांधी अपना यूपीए शासन भूल गए?
सोशल मीडिया पोस्ट में आगे कहा गया कि 2005 में सोनिया गांधी ने नवीन चावला को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया। सोनिया के पास क्या अधिकार थे? 2012 में 2014 के लोकसभा चुनावों की देखरेख के लिए नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति होनी थी।
सत्तारूढ़ दल ने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी ने कांग्रेस को मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन के लिए एक कॉलेजियम बनाने का सुझाव दिया था। कांग्रेस ने इसे नजरअंदाज कर दिया और सीधे वीएस संपत को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त कर दिया और राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से तुरंत मंजूरी भी ले ली।
भाजपा ने आरोप लगाया कि नियुक्ति में विपक्ष को भी विश्वास में नहीं लिया गया। आज विपक्ष के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन के लिए बनी समिति का हिस्सा हैं। नए मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन में रचनात्मक सहयोग देने के बजाय राहुल गांधी सिर्फ नाटक कर रहे हैं।
दरअसल, भाजपा द्वारा शेयर किए वीडियो में राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त और दूसरे चुनाव आयुक्तों को चुनने वाले पैनल से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को हटाने पर इतने आमादा क्यों हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सीजेआई को सिलेक्शन पैनल से क्यों हटाया गया। क्या उनको सीजेआई पर भरोसा नहीं है?