प्रतापगढ़ में परिवार न्यायालय ने 31 टूटते रिश्तों में लौटाई मुस्कान

PRATAPGARH NEWS: न्याय जब संवेदना से जुड़ता है, तब फैसले केवल कागजों तक सीमित नहीं रहते। प्रतापगढ़ की राष्ट्रीय लोक अदालत ने यही उदाहरण पेश किया। परिवार न्यायालय ने 31 वैवाहिक मामलों में बिखरते रिश्तों को जोड़ने का काम किया। गलतफहमियों के अंधेरे में डूबे जीवन में फिर से उजाला लौटा। 13 दिसंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत भावनाओं से भरा दिन बन गई। परिवार न्यायालय की पीठासीन अधिकारी श्रीमती रीता गुप्ता और परामर्शदाता श्रीमती ममता सिंह ने संवेदनशील भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से वर्षों पुरानी दूरी को मिटाने का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस लोक अदालत की सबसे भावुक कहानी साफिया और रहमान की रही। दोनों पिछले 14 वर्षों से अलग-अलग जीवन जी रहे थे। मन में पीड़ा थी, लेकिन संवाद का रास्ता बंद था। लोक अदालत में जब दोनों आमने-सामने बैठे, तो बीते वर्षों का दर्द छलक पड़ा। परामर्श और समझाइश से मन की गांठें खुलीं। सुलह समझौते के बाद दोनों को मुस्कुराते हुए विदा किया गया। यह पल केवल एक फैसले का नहीं, बल्कि टूटे रिश्ते के जुड़ने का था। कुल 31 वैवाहिक मामलों में समझौते हुए। इन समझौतों के साथ कई परिवारों में फिर से उम्मीद जागी। लोक अदालत ने साबित किया कि संवाद से हर विवाद का समाधान संभव है। जनपद न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राजीव कमल पाण्डेय ने किया। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों से अधिक से अधिक मामलों को सुलह के माध्यम से निस्तारित करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि लोक अदालत से वादकारियों को त्वरित और मानवीय न्याय मिलता है। कार्यक्रम का संचालन अपर जिला जज रामलाल द्वितीय ने किया। इस सफल आयोजन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पराविधिक स्वयंसेवकों, पैनल अधिवक्ताओं, मध्यस्थों, एलएडीसीएस कर्मचारियों और बैंक अधिकारियों का सहयोग सराहनीय रहा।

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