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FATEHPUR NEWS: समावेशी और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सार्वजनिक उद्यम विभाग एवं यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में भोपाल स्थित रेडिसन होटल में केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों की क्षमता संवर्धन पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आकांक्षी जिलों के सशक्तिकरण हेतु सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) की प्रभावी भूमिका को सुदृढ़ करना रहा। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी पवन कुमार मीना, आईएएस ने प्रेरक संबोधन देते हुए आकांक्षी जिला कार्यक्रम के अंतर्गत सीएसआर संसाधनों के प्रभावी उपयोग, नवाचारों, सर्वोत्तम प्रथाओं एवं जमीनी चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के क्षेत्र में ठोस सुधार के लिए सामूहिक सहयोग और रणनीतिक भागीदारी पर जोर दिया। श्री मीना ने कहा कि जीवन के प्रथम 1000 दिन में सतत निवेश कुपोषण, कमजोर शैक्षणिक परिणामों और सामाजिक-आर्थिक असुरक्षा के पीढ़ीगत चक्र को तोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाता है, जिससे जिले के दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक विकास को गति मिलती है। उन्होंने आकांक्षी जिला फतेहपुर में संचालित “जीवन के प्रथम 1000 दिन” परियोजना के परिवर्तनकारी प्रभावों को रेखांकित करते हुए बताया कि लाइटहाउस आंगनवाड़ी केंद्र संवेदनशील देखभाल, प्रारंभिक सीखने और माताओं व युवा देखभालकर्ताओं के कल्याण को सुदृढ़ करने के आदर्श मॉडल के रूप में विकसित हो रहे हैं। ये केंद्र केवल सेवा प्रदायगी के स्थल नहीं, बल्कि बाल-संवेदनशील और परिवार-केंद्रित स्थान बनते जा रहे हैं, जहां खेल-आधारित सीख और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से समग्र बाल विकास को बढ़ावा मिल रहा है। अपने प्रस्तुतीकरण में श्री मीना ने यह भी स्पष्ट किया कि सीएसआर केवल वित्तीय सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव संसाधन, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी, नेटवर्क और ब्रांड शक्ति के प्रभावी उपयोग के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का एक सशक्त माध्यम बन सकता है। आकांक्षी जिलों द्वारा चिन्हित प्राथमिक सीएसआर उप-विषय सामाजिक परिवर्तन हेतु नवोन्मेषी सीएसआर मॉडल
समावेशी विकास के लिए भागीदारी का सुदृढ़ीकरण कार्यशाला में अनुभव गर्ग, सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर, वैन लीर फाउंडेशन ने भी सक्रिय सहभागिता की। उन्होंने प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास के लिए आकांक्षी जिलों में सीएसआर सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए बाल-संवेदनशील निर्मित वातावरण, खेल एवं सीखने के उपकरणों तथा फ्रंटलाइन सिस्टम्स के प्रशिक्षण एवं क्षमता संवर्धन की पैरवी की।
कार्यशाला से यह सशक्त संदेश सामने आया कि सीपीएसई द्वारा संचालित नवोन्मेषी सीएसआर पहलें वास्तविक गेम-चेंजर सिद्ध हो सकती हैं, जो वंचित समुदायों को सशक्त बनाकर जिला-स्तरीय विकास परिणामों को तेज़ी से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगी।
कार्यशाला में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, सीपीएसई के सीएसआर प्रमुख, कार्यान्वयन एजेंसियां और सीएसआर विशेषज्ञ शामिल हुए। प्रतिभागियों ने गुजरात, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा पूर्वोत्तर राज्यों—असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के आकांक्षी जिलों के लिए प्रभावी सीएसआर रणनीतियों के सह-निर्माण पर विचार-विमर्श किया।