मानवता की ओर लौटने का पर्व क्रिसमस

PRAYAGRAJ NEWS: हर वर्ष क्रिसमस के आगमन पर यह एहसास होता है कि हमारी दुनिया भले ही तेज और स्मार्ट हो गई हो, लेकिन वह आवश्यक रूप से अधिक दयालु नहीं हुई है। हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ हमारी स्क्रीनें उज्ज्वल हैं, पर हमारी करुणा मंद पड़ती जा रही है। तकनीक ने संवाद को आसान बनाया है, लेकिन रिश्तों में दूरी भी बढ़ाई है। हमारे मोबाइल ऐप्स से भरे हैं, पर हमारे संबंधों में रिक्तता दिखाई देती है. आज हमारे हाथों में स्मार्ट फोन हैं, लेकिन घरों में रिश्ते नाजुक हो गए हैं। बातचीत की जगह स्क्रॉलिंग ने ले ली है। हम संदेशों का उत्तर तुरंत देते हैं, पर सहानुभूति दिखाने में देर करते हैं। हम ‘लाइक्स’ गिनते हैं, रिश्ते खो देते हैंय हमारी टाइमलाइन भरी है, पर दिल खाली हैं। ऑनलाइन जीवन जीते हुए हम वास्तविक जीवन की उपेक्षा करने लगे हैंकृपास बैठे व्यक्ति, जरूरतमंद पड़ोसी, बुजुर्ग और बच्चे। इसी मानवीय टूटन के बीच क्रिसमस का संदेश हमें संबोधित करता है। यीशु का जन्म सादगी और असुरक्षा में हुआ और उनका आगमन गरीबों, पापियों और दबे-कुचलों के लिए आशा और मुक्ति का आश्वासन बना। यह संदेश आज भी धर्म की सीमाओं से परे लोगों को प्रेरित करता है और याद दिलाता है कि कोई भी उपेक्षित नहीं है। क्रिसमस हमें सिखाता है कि करुणामय समाज गति या सफलता से नहीं, बल्कि देखभाल और जुड़ाव से बनता है। अनुभव बताता है कि करुणा बड़े कार्यों से नहीं, बल्कि छोटे मानवीय व्यवहारों से शुरू होती है। ध्यानपूर्वक सुनने, बिना शर्त क्षमा करने और खुशी से बाँटने से। ऐसे सरल कार्य रिश्तों को जोड़ते और विश्वास को पुनर्स्थापित करते हैं। विविध समाज में क्रिसमस के मूल्यकृशांति, सद्भावना, उदारता और सेवा सभी के लिए हैं। इस क्रिसमस, यदि हम अपनी पूर्ण और करुणामय उपस्थिति को उपहार बना सकें, तो हम एक अधिक मानवीय और जुड़ा हुआ समाज बना सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *