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जिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन
LUCKNOW NEWS: उन्नाव बलात्कार कांड में दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को मिली ज़मानत के विरोध में आज लखनऊ में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन, इंक़िलाबी नौजवान सभा और जन संस्कृति मंच के संयुक्त आह्वान पर जोरदार विरोध मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारी परिवर्तन चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च करते हुए पहुँचे और राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। मार्च के दौरान “बलात्कारी को बेल नहीं, जेल दो”, “उन्नाव रेप पीड़िता को न्याय दो” और “न्याय चाहिए—अभी चाहिए” जैसे नारे गूंजते रहे। वक्ताओं ने कहा कि बलात्कारियों को ज़मानत मिलना और पीड़िताओं को न्याय के लिए वर्षों तक संघर्ष करना, न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उत्तर प्रदेश राज्य अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने कहा, “जब सत्ता, पुलिस और न्याय व्यवस्था मिलकर अपराधियों को संरक्षण देती है, तब महिलाओं की सुरक्षा खोखला दावा बन जाती है। उन्नाव की पीड़िता के साथ हुआ अन्याय पूरे समाज के लिए चेतावनी है। हम ज़मानत की इस संस्कृति को स्वीकार नहीं करेंगे।” लखनऊ समन्वयक सरोजिनी बिष्ट ने कहा, “पीड़िता और उसके परिवार को लगातार धमकियाँ, अपमान और संस्थागत उपेक्षा झेलनी पड़ी है। यह लड़ाई सिर्फ़ एक मामले की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ़ है जो पीड़िताओं को चुप कराने पर आमादा रहती है।” अईसा के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव शिवम सफ़ीर ने कहा, “जब बलात्कारियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता है, तब युवाओं की चुप्पी भी अपराध बन जाती है। छात्र और युवा इस अन्याय के खिलाफ़ सड़कों पर उतरेंगे और न्याय सुनिश्चित होने तक संघर्ष जारी रखेंगे।” उत्तर प्रदेश राजीव गुप्ता ने कहा, “कानून का उद्देश्य कमज़ोरों की रक्षा है, न कि ताक़तवर अपराधियों को राहत देना। ज़मानत के ऐसे फ़ैसले आम जनता के भरोसे को तोड़ते हैं और अपराधियों का मनोबल बढ़ाते हैं।” जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कौशल किशोर ने कहा, “यह केवल कानूनी नहीं, सांस्कृतिक संकट भी है—जहाँ अपराधियों का महिमामंडन और पीड़िताओं की चुप्पी सामान्य की जा रही है। इस संस्कृति के खिलाफ़ जनपक्षीय, प्रगतिशील ताक़तों को एकजुट होकर लड़ना होगा।” संयुक्त संगठनों ने मांग की कि कुलदीप सिंह सेंगर की ज़मानत तत्काल रद्द की जाए, पीड़िता को पूर्ण न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, तथा ऐसे सभी मामलों में राजनीतिक संरक्षण समाप्त किया जाए। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।