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LUCKNOW NEWS: दीनदयाल उपाध्याय सेवा प्रतिष्ठान राष्ट्रीय कार्यालय पर राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण मिश्र की अध्यक्षता में आदरणीय स्व. अटल बिहारी वाजपेई जी और स्व. डॉ. शिवकुमार अस्थाना जी की 100वी जन्म जयंती पर मुख्य अतिथि के रूप मे सूर्य प्रताप शाही ( कृषि मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार),डॉ. दिनेश शर्मा (पूर्व उप मुख्यमंत्री, सांसद ) रामाशीष राय (प्रदेश अध्यक्ष लोकदल),संतोष सिंह (विधान परिषद सदस्य), भरत दीक्षित (भाजपा प्रदेश कार्यालय प्रभारी), चौधरी लक्ष्मण सिंह (भाजपा प्रदेश सह कार्यालय प्रभारी) इस अवसर पर प्रतिष्ठान के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण मिश्र ने संवाददाता को बताया कि करीब एक सदी पहले दिसंबर माह में जन्म लेने वाली दो विभूतियों श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी एवं शिव कुमार अस्थाना जी के शताब्दी वर्ष को दीनदयाल उपाध्याय सेवा प्रतिष्ठान नव जागरण वर्ष के रूप में मनाएगा। इसके तहत सन 2026 में साल भर लगातार कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष अटल जी के जीवन के विभिन्न आयामों पर पूरे भारत में गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा तथा नव अंत्योदय पत्रिका का पुनः प्रकाशन किया जायेगा। इस वर्ष स्वर्गीय अस्थाना जी रचित साहित्य का भी पुनः प्रकाशन होगा। यह जानने योग्य है कि साल 1924 को भारतीय संस्कृति की ध्वजा का परचम विश्व में फहराने को लेकर बहुत महत्वपूर्ण है। 27 सितंबर 1925 को विजयादशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई और इससे कुछ माह पूर्व उसके उद्देश्यों को फलीभूत करने के लिए भारत माता की गोद में दो सपूतों को जन्म हुआ। एक अटल जी दूसरे अस्थाना जी। सभी जानते हैं कि भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को हुआ था और उन्होंने आरएसएस के प्रचारक के रूप में पत्रकारिता को माध्यम से देश की सेवा की। कालांतर में प्रधानमंत्री के रूप में भारत का नेतृत्व किया तथा भारतीय राष्ट्रवाद का परचम पूरे विश्व में फहराया।
उसी पथ के अनुगामी डॉ. शिव कुमार अस्थाना जी का जन्म 30 दिसंबर 1924 को हुआ था । अस्थाना जी न केवल उच्च कोटि के लेखक व पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं बल्कि कुशल संगठनकर्ता के रूप में भी लोग उन्हें याद करते हैं । उन्होंने आधा दर्जन से अधिक पुस्तकों का सृजन किया। उन्होंने दर्जनों पत्रिकाओं का संपादन किया तथा दीनदयाल उपाध्याय सेवा प्रतिष्ठान जैसे राष्ट्रव्यापी संगठन को खड़ा किया। अटल की इच्छा थी कि दीनदयाल जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जाय, उसको फलीभूत करने के लिए उन्होंने इस प्रतिष्ठान की स्थापना की। इसके माध्यम से देश में सर्वप्रथम दीनदयाल जी एवं राष्ट्रवादी विचारों को न सिर्फ प्रकाशित किया बल्कि संगोष्ठियों और सेवा प्रकल्पों के माध्यम से उसे जनता के बीच पहुंचाया। उन्होंने नेतृत्वकर्ताओं के विचारों को कार्यकर्ताओं के बीच और कार्यकर्ताओं के कार्यों को नेतृत्वकर्ताओं के समक्ष रखने की परंपरा भाजपा में पहली बार कमल ज्योति पत्रिका के माध्यम से शुरू की। अस्थाना का जन्म शाहजहांपुर के एक संपन्न कायस्थ परिवार में हुआ था। यहां प्रारम्भिक शिक्षा लेने के पश्चात उन्होंने उच्च शिक्षा बरेली में प्राप्त की। विद्यार्थी जीवन में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। स्वतंत्रता के पश्चात वह सेना की लेखा सेवा में लेखाधिकारी नियुक्त हुए। हालांकि स्वतंत्रता के समय हुई हिंसा से दुखी होकर उन्होंने राष्ट्र की सेवा में जीवन समर्पित कर दिया। विभिन्न जिलों में आरएसएस के जिला प्रचारक के रूप में योगदान दिया। दीनदयाल जी के आग्रह पर वे 1966 में जनसंघ में शामिल हुए।
बुंदेलखंड में संगठन मंत्री के रूप में अपना योगदान देकर राजनीतिक कार्य प्रारंभ किया। उन्होंने पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पर कार्य करते हुए सारा लेखा जोखा दुरुस्त किया।1997 में उन्हें विधानपरिषद का सदस्य बनाया गया। 22 मई 1914 में राष्ट्रवादी मोदी सरकार बनने के अपने इच्छित जीवन लक्ष्य को प्राप्त कर वे इस संसार से विदा हुए।
इस अवसर पर प्रमुख लोग उपस्थित रहे जिनमें की ये प्रमुख लोग थे प्रो०डॉ. अमेरिका सिंह, डॉ० अशोक यादव, अशोक राजपूत, प्रोफेसर डॉ. बी. एन. सिंह, जी.डी. शुक्ला, प्रोफेसर बी. एन. मिश्रा, रमेश तूफानी ,संजय चौधरी, अशफ़ाक उल्ला खान और दीनदयाल उपाध्याय सेवा प्रतिष्ठान के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण मिश्रा जवाहर सिंह सुधांशु श्रीवास्तव गोपाल शुक्ला सरल शुक्ला जी शचि अग्रवाल वैभव स्वर्णकार अनिल शुक्ला आर के छारी राजेंद्र पांडे माधव राज यादव विनय यादव संजय सिंह राजेश उपाध्याय सुभाष पांडे आदि उपस्थित रहे।