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JAUNPUR NEWS: गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस का पंचम खंड सुंदरकांड केवल एक अध्याय नहीं, बल्कि जीवन की विषम परिस्थितियों में विजय प्राप्त करने का प्रेरक सफलता सूत्र है। यह विचार सुशील कुमार उपाध्याय, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष जौनपुर ने मृत्युंजय महादेव धाम, उमरछा में प्रत्येक माह प्रदोष के दिन आयोजित सस्वर सुंदरकांड पाठ के समापन अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सुंदरकांड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें भक्त हनुमान के पराक्रम, बुद्धि और समर्पण का अद्भुत वर्णन है। संपूर्ण रामचरितमानस में जहाँ भगवान श्रीराम की महिमा का गुणगान है, वहीं सुंदरकांड में स्वयं प्रभु राम अपने भक्त हनुमान की महिमा का बखान करते हैं। यह हमें सिखाता है कि अटूट विश्वास और शुद्ध संकल्प से समुद्र जैसी बाधाओं को भी पार किया जा सकता है। उन्होंने श्वेता प्रियांशी रामचरितमानस समिति, मलिकानपुर के कलाकारों की मधुर एवं भक्तिपूर्ण प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि उनकी प्रस्तुति ने परिसर को साक्षात लंका दहन और राम-मिलन की अनुभूति करा दी। कार्यक्रम की शुरुआत पंडित हीरामणी उपाध्याय के कुशल सानिध्य में वैदिक रीति-विधान से यजमान शेषनाथ शुक्ल एवं उनकी धर्मपत्नी द्वारा पूजा-पाठ के साथ हुई। कार्यक्रम में उपस्थित दर्शकों के साथ-साथ निर्णायक मंडल के सदस्य ललित शुक्ल, कैलाश नाथ शुक्ल एवं सतीश कुमार उपाध्याय ने अपने निर्णय को बंद लिफाफे में सुरक्षित रखा। जिला मीडिया प्रभारी आमोद सिंह ने कहा कि सुंदरकांड रामचरितमानस का वह पावन अध्याय है जो बजरंगबली हनुमान को समर्पित है। इसका नियमित पाठ आध्यात्मिक, मानसिक, भावनात्मक एवं भौतिक रूप से जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने बताया कि मान्यता है कि सुंदरकांड पाठ से साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में भी कमी आती है। निर्णायक मंडल के सदस्य सतीश कुमार उपाध्याय द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित राजकृष्ण शर्मा, आशीष शुक्ल, सुधांशु सिंह, परविंदर चौहान, रोहित सिंह, इंद्रसेन सिंह, घनश्याम यादव, देवेंद्र सिंह, राजकुमार उपाध्याय, ईश नारायण उपाध्याय, सुरेंद्र मिश्रा, महेंद्र उपाध्याय, अच्छे लाल पांडेय, संजय सिंह एवं बैजनाथ सिंह को स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के आयोजक सुशील कुमार उपाध्याय ने सस्वर सुंदरकांड प्रतियोगिता के प्रतिभागियों—कु. श्वेता यादव, कु. प्रियांशी यादव, नितिन तिवारी, श्रवण तिवारी, आर.पी. सरोज एवं अवधेश यादव—को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के समापन पर रामायण एवं हनुमान जी की आरती के पश्चात भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रभाकर, पद्माकर, सुरेश उपाध्याय, अरुण उपाध्याय, देवेश कुमार उपाध्याय, राकेश शुक्ल, संतोष उपाध्याय, प्रेमा सिंह, अशोक, संतोष सिंह, राजेश, जयशंकर शुक्ल, संतोष शुक्ल ढोलन, अरविंद, सूरज, दीनानाथ, अनिल, विकास, रमेश निषाद सहित सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।