पेशकार को मकान का कब्जा दिलाने में सिविल जज व राजस्व अधिकारियों पर गिरी गाज

हाईकोर्ट ने विभागीय कार्यवाही करने तथा जांच कर ऐक्शन लेने का दिया आदेश
पेशकार को याची को परेशान करने व अवैध बेदखली करने के लिए एक लाख मुआवजा देने का निर्देश

PRAYAGRAJ NEWS: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिद्धार्थ नगर जिला अदालत के सिविल जज कनिष्ठ श्रेणी के खिलाफ दुर्भाग्यपूर्ण अवैध कार्यवाही करने के लिए विभागीय जांच शुरू करने के लिए पत्रावली मुख्य न्यायाधीश को भेज दी है,साथ ही संबंधित पेशकार के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने कहा पेशकार के पक्ष में याची व परिवार को बेदखल कर मकान का कब्जा दिलाने में तहसीलदार बांसी व राजस्व टीम ने प्रशासनिक शक्ति का दुरूपयोग किया और दुर्भाग्यपूर्ण कार्य किया,जिसकी जांच की जानी चाहिए। कोर्ट ने मकान से बेदखल याची सोनी व अन्य हिस्सेदारों को 48घंटे में मकान का कब्जा सौंपने का आदेश दिया है साथ ही पेशकार को निर्देश दिया है कि वह एक हफ्ते में याची को परेशान करने व अवैध बेदखली करने के एवज में एक लाख रुपए बतौर मुआवजा भुगतान करें। कोर्ट ने कहा यदि आदेश का पालन नहीं होता तो वसूली कार्यवाही कर एक माह के भीतर मुआवजे का याची को भुगतान कराया जाय। यह आदेश न्यायमूर्ति एम के गुप्ता तथा न्यायमूर्ति अरूण कुमार की खंडपीठ ने खेसराहा थाना क्षेत्र की सोनी की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। मालूम हो कि एक पेशकार की पद की हनक व मनमानी के  कारण खुद उलझा ही और  सिविल जज कनिष्ठ श्रेणी सहित जिला राजस्व अधिकारियों को बुरी तरह फंसा दिया। पेशकार ने याची महिला के शराबी पति व उसके एक भाई से अविभाजित पैतृक मकान का एक हिस्सा खरीद लिया।और मकान पर कब्जे की कोशिश नाकाम होने पर सिविल वाद दायर कर तारीख पर तारीख लगवाते हुए एकपक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश प्राप्त कर लिया।और तहसीलदार ने कब्जा दिलाने के लिए राजस्व टीम बना दी।एस पी सिद्धार्थ नगर को पत्र लिखकर पुलिस बल व राजस्व की के जरिए जबरन मकान पर याची परिवार को बेदखल कर कब्जा ले लिया। जिसपर महिला ने हाईकोर्ट की शरण ली।
कहा बिना उसे सुने एकपक्षीय आदेश से अवैध कब्जा लिया गया है।उसे कब्जा वापस दिलाया जाय और अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाय। याची का कहना था कि मकान उसके ससुर का है,उनकी मौत के बाद चार बेटों व मां के नाम दर्ज हो गया।याची मकान में स्थित दूकान चलाकर अपने बच्चों का गुजारा करती रही है। उसके पति की बुरी लत के कारण पेशकार ने उनका हिस्सा बैनामा करा लिया।और अन्य हिस्सेदारों को पक्षकार भी नहीं बनाया,केवल एक को पक्षकार बनाकर एकपक्षीय आदेश प्राप्त कर लिया। मुकद्दमे की याची को भनक भी नहीं लगी।जब पेशकार कब्जा लेने आया तो स्थिति पता चली।जींस पर उसने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने कहा सिविल जज ने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण किया, मुकद्दमे की लगातार सुनवाई कर एकपक्षीय व्यादेश पारित किया और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी प्रशासनिक शक्ति का दुरूपयोग किया। और दुर्भाग्यपूर्ण कार्यवाही की।जिसकी जांच की जानी चाहिए।

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