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उरई में अतिक्रमणकारियों पर प्रशासन का डंडा, एक हफ्ते का अल्टीमेटम — वरना जब्ती और मुकदमा तय!
JALAUN NEWS: उरई शहर की सड़कों पर अब तक जो अतिक्रमण महोत्सव चल रहा था, उस पर प्रशासन ने आखिरकार ब्रेक लगा दिया है। अंबेडकर चौराहे से लेकर बाजार के अंदरूनी हिस्सों तक, जहां हर मोड़ जाम का पर्याय बन चुका था, वहां अब सख्ती की आहट सुनाई देने लगी है। प्रशासन ने साफ शब्दों में चेतावनी दे दी है—एक हफ्ते के भीतर अतिक्रमण हटाइए, नहीं तो सामान जब्त होगा और मुकदमा भी लिखा जाएगा। इस फैसले के बाद उन दुकानदारों में खलबली मची है, जो सालों से सड़क को अपनी निजी दुकान समझ बैठे थे। दो फुट की वैध दुकान को दस फुट में फैलाना, उसके आगे ठिलिया लगवाना, रोज़ के 200 रुपये वसूलना और फिर उसी जगह ग्राहकों की बाइक-स्कूटर खड़ी करवाना—यह सब उरई की सड़कों पर आम नज़ारा बन चुका था। नतीजा? हर चौराहा स्थायी जाम का अड्डा और आम आदमी का धैर्य जवाब देता हुआ। शहर की यातायात व्यवस्था इस कदर उलझ चुकी थी कि पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ सिर्फ नक्शों में ही बचे थे। फुटपाथों पर दुकान का सामान, ठिलियां और गाड़ियाँ ऐसे पसरी रहती थीं, मानो सड़क नहीं बल्कि किसी का निजी आंगन हो। आधी सड़क अतिक्रमण में, आधी बेतरतीब पार्किंग में—तो भला वाहन चलेंगे कहां से? अब जब प्रशासन ने जाम से निजात पाने के लिए कई कट बंद किए, तो वही अतिक्रमणकारी दुकानदार सबसे ज्यादा शोर मचा रहे हैं। जिन्हें कल तक जाम से कोई फर्क नहीं पड़ता था, आज उन्हें “व्यापार चौपट” होने की दुहाई याद आ रही है। स्थानीय लोगों का साफ कहना है—पहले अतिक्रमण हटाइए, फिर कट खोलिए। सच यही है कि अगर दुकानदार अपनी हद में रहें, ठेलियां सड़क से हटें और अवैध पार्किंग पर सख्ती हो, तो जाम अपने आप गायब हो सकता है। लेकिन यहां तो हाल यह है कि अतिक्रमण करने वाले खुद को पीड़ित और आम जनता को दोषी बताने में जुटे हैं। अब प्रशासन ने जो सख्त रुख अपनाया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि दबाव में आए बिना कार्रवाई जारी रखी जाए। तभी कट भी खुलेंगे, जाम भी घटेगा और उरई की सड़कों पर लोग जाम नहीं, सुचारु यातायात का असली स्वाद ले पाएंगे। वरना रोज़ की तरह जाम का वही चटपटा जायका शहरवासी मजबूरी में चखते रहेंगे।