होनहार विरवान के होत चिकने पात, मिर्जापुर के लाल ने भरी उड़ान, प्राप्त की डाक्टर आफ फिलासिपी की उपाधि

फोटो: डाक्टर आशीष मिश्रा व उसके पिता उमादत्त मिश्रा

MIRZAPUR NEWS: (अमरेश चन्द्र पाण्डेय) कहा गया है कि हौसले बुलन्द हो तो इंसान तो इंसान भगवान भी हार मान लेता है। मिर्जापुर की माँटी के सुगन्ध में पले-बढ़े, पंडित अनन्त राम मिश्र वैध की गली में खेले कूदे, आशीष मिश्रा एक छोटे बच्चे से जब डॉक्टर आशीष मिश्रा बनते है तो साथी-दोस्तों को, माता-पिता व पूरे परिवार को गली-मुहल्लों को तथा समस्त जनपद वासियों को खुशी व गर्व होना स्वाभाविक है। अपनी दृढ़ इच्छा, संकल्प शक्ति से फार्मा कोलाजी में ‘डिप्रेशन में ड्रग’ पर (पी.एच.डी.) पर रिसर्च कर प्रोफेसर बनने की अपनी इच्छा पूर्ण कर अपनी मंजिल प्राप्त कर लिये हैं। उन्हें गत दिनों फगवाड़ा, पंजाब स्थित “लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा “डाक्टर आफ फिलासिपी “की उपाधि से सम्मानित किया गया है। संस्कृत महाविद्यालय के विभागाध्यक्ष स्व पं. जमुना प्रसाद मिश्र के पौत्र व सर्वोदय इण्टर कालेज के प्रबंधक उमादत्त मिश्रा  के सुयोग्य पुत्र डा. आशीष मिश्रा की सफलता पर उन्हे बधाई देने वालों का तांता लगा है। डा. आशीष मिश्रा की कामयाबी पर जनपदवासी भी गर्व कर रहे हैं। डा. आशीष मिश्रा अपनी सफलता का जो परचम लहराया है वह अन्य युवाओं के लिये प्रेरणा प्रद हैं। डा. आशीष मिश्रा का जनपद के युवाओं के लिये एक संदेश है कि उन्हें जहां और जिस दिशा में भी जाना है। सबसे पहले वे अपने लक्ष्य तय करें। उसके लिए रात की नींद व दिन का चैन हराम कर दे, मंजिल अवश्य मिलेगी।  डॉ. आशीष मिश्रा का ‘डिप्रेशन में ड्रग का असर चैप्टर पर अब तक दस आर्टिकल व सात पुस्तके लिखी प्रकाशित हो चुकी है। डॉ. आशीष मिश्रा  वर्तमान में चुनार स्थित एपेक्स इंस्टीट्यूट में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है। उनके इस मानसिक अवसाद पर किए गए गहन शोध से अवसाद के प्रभावी इलाज के लिए मिल का पत्थर माना जा रहा है। उनके इस शोध के लिए देश विदेश के विशेषज्ञों द्वारा सराहा जा रहा है। जनपद वासियों ने उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष की कामना की है ।

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