मां की याद में छलक आई संवेदना

शोक भोज नहीं, बच्चों की मुस्कान बनी श्रद्धांजलि

JALAUN NEWS: मां के जाने का गम शब्दों में नहीं बंधता, लेकिन कुछ फैसले ऐसे होते हैं जो निजी पीड़ा को समाज के लिए संदेश बना देते हैं। ग्राम चुर्खी निवासी इंजीनियर राजा भैया एड ने अपनी माता स्मृतिशेष मालती देवी के निधन पर परंपरागत शोक भोज का आयोजन न कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। मां की स्मृति में उन्होंने गरीब व जरूरतमंद बच्चों को कॉपी-किताब, पेन-पेंसिल वितरित कर शिक्षा का उजास बांटा। बच्चों के चेहरों पर आई मुस्कान मानो मां के संस्कारों की सजीव तस्वीर बन गई। इस अवसर पर उन्होंने एक वाटर कूलर बस स्टैंड चुर्खी लगवाने की भी घोषणा की, जिससे आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध पेयजल की सुविधा मिल सके। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने भगवान बुद्ध के चित्र पर पुष्प अर्पित किए तथा संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे निर्णय केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने वाले क्षण होते हैं। यह पहल महापुरुषों की विचारधारा, मानवीय मूल्यों और संविधान की चेतना को आगे बढ़ाने का कार्य करती है। भावुक वातावरण में सभी ने स्मृतिशेष मालती देवी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कई लोगों की आंखें नम रहीं और शब्द मौन में बदल गए। उपस्थितजनों ने इंजीनियर राजा भैया के इस मानवीय निर्णय को साहस, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक बताया। इस अवसर पर महेंद्र कठेरिया, शैलेन्द्र ज्ञागिक, राहुल गौतम, प्रदीप महतवानी, जगदीश कठेरिया वैध बिनौरा, संजू कठेरिया, महेंद्र भदारी, करन बरार, सुंदर दीवान, छत्रपाल, देवेंद्र पिरौनिया एड., हरिकिशुन छौंक, विनोद मुखिया, रामश्री वर्मा, सोबरन सिंह, इं. संजय कुशवाहा, पंकज राठौर सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

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