मन की पवित्रता में हुआ करता है प्रभु श्रीराम का दर्शन:आचार्य देवव्रत जी

लालगंज में मानस सम्मेलन में श्रीराम की महिमा का गुणगान सुन मगन हुए श्रद्धालु

PRATAPGARH NEWS:  लालगंज नगर के सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कालेज में मानस सम्मेलन के दूसरे दिन मंगलवार को कथाव्यास प्रयागराज से पधारे आचार्य देवव्रत जी महराज ने कहा कि मन की पवित्रता तथा चरित्र से ही श्रीराम की कृपा मिला करती है। उन्होने कहा कि भगवान की प्राप्ति का एक मात्र साधन मन की शुद्धता है। आचार्य देवव्रत जी ने कहा कि प्रभु श्रीराम का चरित्र युवाओं के लिए आज के युग में सबसे अधिक सम्बल प्रदान करता है। उन्होने उदाहरण देते हुए बताया कि रावण ने भी सीताहरण के बाद राम के स्वरूप को धारण करने की कल्पना की थी। उन्होने कहा कि रावण को भगवान राम का स्मरण करते ही दूसरी महिलाएं मां के स्वरूप में दिखने लगी। आचार्य देवव्रत जी ने कहा कि आज सनातन पर सबसे बड़ा संकट मानस की विकृति है। उन्होने कहा कि युवाओं को इन विकृतियों से बचाने के लिए चरित्र निर्माण की प्रेरणा प्रदान करना ही सनातन की सर्वश्रेष्ठ सुरक्षा है। उन्होने कहा कि भगवान श्रीराम भक्ति के अधीन हैं। उदाहरण के तौर पर सबरी तथा केवट प्रसंग सुनाते हुए कहा कि यह शुद्ध भक्ति भाव में प्रभु के आराधक रहे। उन्होने कहा कि भक्ति के सामने भगवान श्रीराम को स्वयं इन्हें दर्शन देना पड़ा। कथा में कथावाचक सचिन कृष्ण जी महराज का भी श्रद्धालुओं ने माल्यार्पण कर स्वागत किया। इसके पहले सावित्री वेलफेयर ट्रस्ट के तत्वाधान में हो रही कथा में श्रीराम दरबार के समक्ष कथा के संयोजक अनूप प्रतापगढ़ी, प्रधानाचार्य उमाशंकर मिश्र तथा अधिवक्ता ज्ञानप्रकाश शुक्ल ने दीप प्रज्ज्वलन किया। संचालन साहित्यकार जयप्रकाश पाण्डेय सरल ने किया। श्रद्धालुओं का स्वागत शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य प्रदोष नारायण सिंह ने किया। इस मौके पर पं0 वीरेन्द्रमणि तिवारी, केशवराम ओझा, वैभव त्रिपाठी, उमेशपाल तिवारी, राजू मिश्र, मोनू पाण्डेय, रवीन्द्र तिवारी, श्रीधर तिवारी, दयाराम वर्मा, आचार्य प्रभाकर शुक्ल, राजा शुक्ला, संजय शुक्ला, दिनेश सिंह, साकेत मिश्र आदि रहे।

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