बच्चों को शिक्षित, संस्कारवान बनाना है: इन्द्रजीत त्रिपाठी

ज्वाला देवी सरस्वती शिशु मंदिर में बच्चों ने किया मातृ-पितृ पूजन
PRAYAGRAJ NEWS: ज्वाला देवी सरस्वती शिशु मंदिर के प्रांगण में आज भारतीय संस्कृति के उच्च आदर्शों को जीवंत करता श्मातृ-पितृ पूजनश् समारोह हर्षोल्लास और भावुक वातावरण में सम्पन्न हुआ। पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण के दौर में बच्चों के अंदर अपने माता-पिता के प्रति श्रद्धा और समर्पण भाव जागृत करने के उद्देश्य से विद्यालय द्वारा यह विशेष आयोजन किया गया।  कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती, भारत माता और  के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। इसके पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विद्यालय के छात्रों ने अपने माता-पिता को उच्च आसन पर बैठाकर विधि-विधान से उनका पूजन किया। बच्चों ने श्रद्धाभाव से अपने माता-पिता के चरण पखारे, कुमकुम का तिलक लगाया और आरती उतारकर उनकी प्रदक्षिणा की। इस दौरान वातावरण में गूंजते ष्मातृ देवो भव, पितृ देवो भवष् के उद्घोष ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। जब नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपने माता-पिता को गले लगाया, तो कई अभिभावकों की आँखें भर आईं। यह दृश्य अत्यंत मार्मिक और प्रेरणादायी था। विद्यालय के प्रधानाचार्य इन्द्रजीत त्रिपाठी ने कहा कि ष्माता-पिता पृथ्वी पर साक्षात देवता हैं।जहां पाश्चात्य संस्कृति में श्वैलेंटाइन्स डेश् जैसे दिवस बाह्य आकर्षण को बढ़ावा देते हैं, वहीं हमारी संस्कृति में मातृ-पितृ पूजन दिवस पारिवारिक मूल्यों और आत्मीयता को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों को संस्कारवान बनाना भी है। ऐसे आयोजनों से बच्चों में सेवा, समर्पण और कृतज्ञता के भाव उत्पन्न होते हैं जो भविष्य में एक श्रेष्ठ समाज के निर्माण में सहायक होंगे। यह कार्यक्रम  शिशु वाटिका प्रमुख श्रीमती कंचन लता  व समस्त आचार्य के सहयोग से सम्पन्न हुआ।

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