Physical Address
Pratahkal Express Newspaper
79A-Moti Lal Nehru Road Prayagraj
Opp Women’s Hostel Allahabad University
सिस्टम की चूक या सुनियोजित खेल? शिक्षा विभाग की साख पर दाग
गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज विवाद: 700 छात्रों का साल बर्बाद, जवाबदेही किसकी?
KUSHINAGAR NEWS: माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा 18 फरवरी को शुरू होने वाली बोर्ड परीक्षा के पहले एक ऐसी प्रशासनिक लापरवाही सामने आयी है जिसने एक ही झटके मे 700 परीक्षार्थियों का भविष्य अंधेरे मे धकेल दिया है। किसी ने कल्पना नही की थी कि इन छात्रो की सालभर की मेहनत, उम्मीदों की गठरी और भविष्य का भरोसा सब कुछ विद्यालय और डीआईओएस दफ्तर के जिम्मेदारो के मनबढ लापरवाही की भेट चढ जायेगी। यह प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सात सौ छात्रों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ है। परीक्षा जैसे संवेदनशील मामले में इतनी बड़ी चूक यह साबित करती है कि जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठे लोग या तो सो रहे थे या फिर सब कुछ जानते हुए सूरदास बने हुए थे। मामला पडरौना नगर के रामकोला रोड संचालित गोस्वामी तुलसीदास इंटर कालेज का है जहा विद्यालय के प्रधान लिपिक ज्ञान प्रकाश पाठक ने कथित रूप से नोडल अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर सात सौ परीक्षार्थियों के सपने को चकनाचूर कर दिया है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी अनियमितता बिना प्रशासनिक संरक्षण के कैसे संभव हुई? यह प्रकरण नोडल अधिकारी की भूमिका और डीआईओएस कार्यालय के जिम्मेदारो के कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खडा करती है। यदि नोडल अधिकारी के हस्ताक्षर फर्जी किए गए तो समय रहते आपत्ति क्यों नहीं उठाई गई? आखिर 700 छात्रों की परीक्षा संबंधी प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी पर डीआईओएस कार्यालय ने समय रहते निगरानी क्यों नहीं की? क्या विभागीय स्तर पर लापरवाही हुई या फिर मिलीभगत? यह मनबढई यदि विद्यालय और विभाग की जानकारी में हुआ है,तो फिर इनके खिलाफ दण्डात्मक कार्रवाई क्यो नही की जाए? हालाकि मामले की गंभीरता को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश के सचिव भगवती सिंह ने संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल सतीश सिंह को पूरे प्रकरण की तत्काल जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने का निर्देश दिए हैं। विभागीय पत्र के अनुसार जांच टीम गठित कर दी गई है और रिपोर्ट के आधार पर सख्त कदम उठाए जाने का दावा किया जा रहा है लेकिन सवाल है कि क्या इस बार सच सामने आएगा या फिर फाइलों में दब जाएगा?
फर्जी हस्ताक्षर का खेल
प्रारंभिक जांच में गोस्वामी तुलसीदास इंटर कालेज के प्रधान लिपिक ज्ञान प्रकाश पाठक पर नोडल अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर करने का मामला सामने आया है। यदि यह सच है, तो यह केवल विभागीय अनियमितता अथवा लापरवाही नहीं बल्कि आपराधिक कृत्य है। दोष सिद्ध होने पर धारा 14 के तहत दो साल से लेकर सात साल कारावास व जुर्माने का प्राविधान है। ऐसे मे सवाल उठना मुनासिब है कि इतनी बड़ी चूक बिना प्रशासनिक संरक्षण के कैसे संभव हुई?
क्या मामला?
माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव द्वारा जारी पत्र के मुताबिक , पत्राचार पंजीकरण, शुल्क जमा, अर्हता सत्यापन और अनुसरण प्रमाणपत्रों की वैधता जैसे बुनियादी बिंदुओं पर समय रहते जांच और निगरानी नहीं की गयी। अंतिम तिथि बीतने के बाद खामियां सामने आईं और अब 700 छात्रों के आवेदन निरस्त कर दी गयी। शिक्षा तंत्र की यही चूक छात्रों और अभिभावकों पर भारी पड़ गई। जिन बच्चों ने साल भर तैयारी की, वे अब अनिश्चितता में हैं।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
जानकारों का कहना है कि यदि पंजीकरण और शुल्क समय पर जमा नहीं हुए थे, तो तत्काल आपत्ति क्यों नहीं दर्ज की गई?अनुसरण प्रमाणपत्रों की वैधता की जांच पहले क्यों नहीं की गयी ? इतना ही नही अंतिम तिथि तक अपात्र छात्रों के फॉर्म स्वीकार कैसे होते रहे? चर्चा-ए-सरेआम है कि यदि समय रहते नोडल स्तर पर सख्ती दिखाई जाती और डीआईओएस कार्यालय प्रभावी निगरानी करता, तो सात सौ छात्रों का भविष्य दांव पर नहीं लगता।
डीआईओएस कार्यालय की भूमिका संदिग्ध
कहना ना होगा कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पहले भी विवादों में रहा है। हाल ही में एक निजी कर्मचारी द्वारा फर्जी हस्ताक्षर और अनियमितता का मामला सामने आया था।
लगातार उठते सवाल बताते हैं कि समस्या केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरी कार्यप्रणाली में है। ऐसे मे 700 छात्रों की परीक्षा प्रक्रिया में आई गड़बड़ी की जिम्मेदारी सिर्फ लिपिक पर डालकर मामले को लीपापोती नही किया जा सकता बल्कि डीआईओएस और संबंधित नोडल अधिकारी की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
छात्रों मेआक्रोश, अभिभावकों मे बढी चिंता
अभिभावकों का कहना है कि गलती यदि संस्थागत है तो सजा छात्रों को क्यों? इन छात्रों ने न तो नियम तोड़े, न गलती की फिर सजा उन्हें क्यो? उनके एक वर्ष का भविष्य अधर में लटक गया। इन 700 छात्रों ने सालभर पढ़ाई की, फीस भरी, तैयारी की लेकिन सिस्टम की लापरवाही ने उनका एक साल दांव पर लगा दिया है। अभिवावकों ने शिक्षा विभाग को जिम्मेदारों पर कार्रवाई करते हुए छात्रों के हित में समाधान निकालने की मांग की है।