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वीडियो में कैद ‘पेपर मूवमेंट, बिना पुलिस अभिरक्षा कैसे निकले प्रश्नपत्र?
रिजर्व पेपर कांड के बाद अब परिवहन सवाल: क्या नहीं सुधरा परीक्षा तंत्र?”
KUSHINAGAR NEWS: माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा हाईस्कूल व इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा की शुरुआत से ठीक पहले ही उसकी गोपनीयता व पवित्रता पर सवालों का साया पड़ गया है। जिस प्रश्नपत्र को पुलिस अभिरक्षा में कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया जाना चाहिए था, वह निजी वाहनों से ढोया जा रहा था। यह दृश्य‘सुरक्षित और पारदर्शी परीक्षा’ के सरकारी दावों की बुनियाद हिला दी है। मजे की बात यह है कि नियम और परीक्षा प्रोटोकॉल को ताक पर रखकर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी व्यवस्था के नाम पर परीक्षा की गोपनीयता की धज्जियाँ उडाते दिखे। सवाल यह है कि यह लापरवाही है या जिम्मेदारो का सुनियोजित खेल?bl बेशक! क्या बोर्ड परीक्षा की गोपनीयता ‘जिम्मेदारों की मर्जी’ पर टिकी है? बोर्ड परीक्षा के प्रति जिम्मेदारो की सार्वजनिक हुई यह गैरजिम्मेदाराना कारस्तानी यह संकेत दे रहा है कि निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल को दरकिनार कर प्रश्नपत्रों को पुलिस सुरक्षा के बिना निजी गाड़ियों से भेजा गया जिसका वीडियो साक्ष्य के तौर पर मौजूद हैं, जो परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है।इधर अफसरशाही की खामोशी पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।
क्या कहते है बोर्ड के नियम
कहना ना होगा कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित बोर्ड परीक्षाओं के संचालन नियमावली में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। गाइडलाइन पर गौर करे तो प्रश्नपत्रो सुरक्षित कोठार के स्ट्रांग रूम में सीलबंद रखने का नियम है। वितरण के समय अधिकृत अधिकारी की अनिवार्य रुप से उपस्थिति में
प्रश्नपत्रों का परिवहन पुलिस अभिरक्षा में करने का प्राविधान है। इसके अलावा विभाग द्वारा अधिकृत वाहन अथवा बस मे प्रश्नपत्रो को सुरक्षित रखकर पुलिस अभिरक्षा में केन्द्र तक प्रश्नपत्रो को सकुशल व सुरक्षित भेजवाने का नियम है जिसका विधिवत अभिलेखीकरण व वीडियोग्राफी कराना अनिवार्य है। इन प्रावधानों का उद्देश्य स्पष्ट है कि गोपनीयता अक्षुण्ण रहे और परीक्षा की निष्पक्षता पर कोई आंच न आए। उद्देश्य यह भी है कि किसी भी प्रकार की पेपर लीक, छेड़छाड़, अथवा अनधिकृत हस्तक्षेप की आशंका न हो।
सवाल – पे- सवाल
गौरतलब है कि बोर्ड परीक्षा से संबंधित प्रश्नपत्रों को बिना पुलिस सुरक्षा के निजी वाहनों में चालक और संबंधित प्रधानाचार्य के भरोसे केंद्रों तक रवाना किया गया है। ऐसे मे यह न केवल बोर्ड परीक्षा नियमों की खुली अवहेलना है बल्कि परीक्षा की गोपनीयता को जोखिम में डालने जैसा कृत्य भी है। अब सवाल यह है कि क्या प्रश्नपत्रो के परिवहन से पूर्व पुलिस विभाग को सूचना दी गई थी? क्या अधिकृत वाहनों को सूचीबद्ध कर रूट प्लान स्वीकृत किया गया था?
क्या वितरण रजिस्टर और सुरक्षा अभिलेख पूर्ण हैं?यदि इन प्रश्नों के उत्तर नकारात्मक हैं, तो यह सीधे तौर पर जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार गुप्त व परीक्षा लिपिक सुभाष प्रसाद यादव की घोर लापरवाही को दर्शाता है।
डीआईओएस कार्यालय की मनबढ़ई?
जिले में चर्चा-ए-सरेआम है कि नियम विरुद्ध यह कृत्य जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार गुप्त व परीक्षा लिपिक सुभाष प्रसाद यादव की जानकारी और निगरानी में हुआ। यदि ऐसा है, तो यह साधारण चूक नहीं, बल्कि मनबढई का जीता-जागता उदाहरण है जो उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के विरुद्ध है। सबब यह है कि परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, वही नियमों को ठोकर पर रख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि बोर्ड की सख्त गाइडलाइन के बावजूद अगर निजी वाहनों से प्रश्नपत्र भेजा गया है ,वह भी बिना पुलिस अभिरक्षा के, तो व्यवस्था की गंभीर चूक को दर्शाता है। मजे की बात यह है कि जिला विद्यालय निरीक्षक व परीक्षा लिपिक द्वारा बिना सुरक्षा व्यवस्था के निजी वाहनो से बेपरवाह तरीके से भेजे जा रहे प्रश्न पत्रों को मीडिया ने साक्ष्य के तौर पर कैमरे मे कैद कर लिया है। जब डीआईओएस और परीक्षा लिपिक ने इस मामले मे अपनी चुप्पी नही तोडी तो मीडिया ने प्रभारी जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी वंदिता श्रीवास्तव को इसकी जानकारी दी।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रभारी जिलाधिकारी तथ्यात्मक जांच कर जिम्मेदारी तय करती है या फिर मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा। जानकारों का कहना है कि बोर्ड परीक्षा लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी संवेदनशील प्रक्रिया है। इसकी पवित्रता पर जरा-सी भी आंच पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है।
परिवहन बजट हड़पने की साजिश
हाईस्कूल एंव इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा शुरू होने से पहले जिले में उठे सवाल सिर्फ लापरवाही तक सीमित नहीं रहे। चर्चा जोरो पर है कि प्रश्नपत्रों को पुलिस अभिरक्षा और अधिकृत बस के बजाय निजी वाहनों से भेजे जाने के पीछे परिवहन बजट हड़पने की योजना है। यदि यह सही है, तो मामला प्रशासनिक चूक के साथ साथ वित्तीय अनियमितता का मामला भी है।
पिछली परीक्षा का साया
कहना ना होगा कि जनपद में यह पहला अवसर नहीं है जब परीक्षा संचालन पर सवाल उठे है। पिछले वर्ष विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार गुप्त के कार्यकाल में ही बोर्ड परीक्षा के दौरान गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया था। उस समय अशोक विद्यापीठ इंटर कॉलेज में नियमित प्रश्नपत्र के स्थान पर रिजर्व पेपर से परीक्षा कराए जाने का मामला सुर्खियों में रहा। उस घटना ने परीक्षा प्रबंधन की सतर्कता और निगरानी व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े किए थे।अब जब फिर प्रश्नपत्रों के परिवहन में अनियमितता का आरोप सामने आया है, तो स्वाभाविक रूप से पिछली घटना की याद ताजा हो गई है। सवाल यह है कि क्या जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार गुप्त ने पिछले अनुभवों से कोई सबक लिया या नहीं?