विधानसभा में युवाओं के लिए रोजगार को लेकर ठोस नीति बनाये जाने को लेकर मोना ने दागा सवाल

कांग्रेस विधानमण्डल दल की नेता ने आउटसोर्सिंग नौकरी को युवाओं के भविष्य के लिए बताया धोखा

PRATAPGARH NEWS:  रामपुर खास की विधायक एवं कांग्रेस विधान मण्डल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने शुक्रवार को विधानसभा में सरकार के समक्ष प्रदेश में बेरोजगारी के कारण युवाओं में अनिश्चितता को लेकर सवाल दागा। उन्होंने विधानसभा में कहा कि आउटसोर्सिंग नौकरी प्रदेश के युवाओं के भविष्य के लिए सबसे बड़ा धोखा है। उन्होंने सरकार से कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालय और डिग्री कालेज में जो पारम्परिक पाठ्यक्रम बीएससी, बीए, बीकाॅम है, इसमें प्रतिवर्ष पचास लाख से ज्यादा छात्र पंजीकृत हुआ करते हैं। विधायक आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि हर साल लाखों युवा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रोजगार की तलाश में निकलते हैं। उन्होंने प्रदेश की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार के द्वारा युवाओं के रोजगार के प्रति रूचि न दिखाया जाना बेहद चिन्ताजनक हैं। कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि आज प्रदेश का अधिकांश युवा संविदा और आउटसोर्सिंग आधारित नौकरी करने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि इस नौकरी में वेतन आठ से दस या बारह हजार मात्र है। उन्होंने कहा कि चिंताजनक यह है कि पीएफ बहुत कम है अथवा है ही नहीं और दुर्घटना बीमा जैसी सुविधा की कोई व्यवस्था भी नहीं है। उन्होंने कहा कि कम्पनियों द्वारा नौकरी से निकाले जाने और छटनी का डर भी प्रदेश के युवाओं में अनिश्चितता का माहौल बनाये हुये है। उन्होंने कहा कि सरकार की इच्छाशक्ति युवाओं को स्थायी नौकरी देने की न होना भी दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार से कहा कि वह युवाओं को स्थायी नौकरी और सम्मानजनक वेतन दिये जाने को लेकर ठोस नीति तैयार करें। वहीं सदन में बजट पर सरकार की घेराबंदी करते हुये सीएलपी नेता मोना ने कहा कि सरकार ने पिछले पांच माह पूर्व यह घोषणा की थी कि प्रदेश में आउटसोर्सिंग निगम बनेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह भी कहा था कि जैम पोर्टल से नियुक्ति के साथ न्यूनतम वेतन सोलह से बीस हजार होगा। उन्होंने कहा कि इस पर भी सरकार प्रगति नहीं बता पा रही है। विधायक मोना ने कहा कि प्रदेश का युवा रोजगार की तलाश में थक रहा है और रिक्त नौकरियों पर सरकार भर्ती भी नहीं कर पा रही है। वहीं मनरेगा को लेकर भी भाजपा सरकार की घेराबंदी करते हुए कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि इसे समाप्त करके ग्रामीण क्षेत्र के आम आदमी की आय की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी गयी है। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा में रोजगार मांगना कानूनी अधिकार था, अब इसे सीमित कर मात्र एक सौ पच्चीस दिन तय कर दिया गया है। उन्होंने यूपी में मनरेगा की मजदूरी की दैनिक मजदूरी को देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में बहुत कम करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विकास के नाम पर सिर्फ निजीकरण कर रही है। उन्होंने कहा कि बड़े बजट का दिखावा मात्र करके किसानों, युवाओं, आम आदमी तथा प्रदेश के दलितों पिछड़ों के साथ गरीबों के साथ धोखा किया जा रहा है। कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना के वक्तव्य की जानकारी यहां मीडिया प्रभारी ज्ञान प्रकाश शुक्ल के हवाले से जारी विज्ञप्ति में दी गयी है।

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