प्रिंट रेट से अधिक दाम पर गुटका बिक्री से उपभोक्ता परेशान, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

जनता का सीधा सवाल – पान मसाला की किल्लत या कालाबाजारी?
FATEHPUR NEWS:  समूचे जनपद में गुटखा और पान मसाला प्रिंट रेट से अधिक मूल्य पर बेचे जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि थोक स्तर पर दाम बढ़ाए जाने के कारण खुदरा दुकानदार मजबूरी में ऊंचे दाम वसूल रहे हैं। जानकारी के अनुसार, ₹140 प्रिंट रेट वाला एक पान मसाला पैकेट थोक बाजार में ₹200 से ₹220 तक में बेचे जाने की बात कही जा रही है। इसके चलते कस्बे एवं ग्रामीण क्षेत्रों की गुमटियों और परचून दुकानों में पाउच पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से ज्यादा रकम वसूली जा रही है। कुछ छोटे दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बड़े स्टॉकिस्ट माल की कमी बताकर सीमित मात्रा में आपूर्ति कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऊंचे दाम पर माल मिलने के कारण वे भी उपभोक्ताओं से अधिक मूल्य लेने को विवश हैं। वहीं जीएसटी या कर वृद्धि की चर्चाओं को लेकर आधिकारिक स्तर पर कोई स्पष्ट सूचना उपलब्ध नहीं है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो यह मुनाफाखोरी स्थायी रूप ले सकती है। प्रिंट रेट से अधिक मूल्य पर बिक्री उपभोक्ता संरक्षण नियमों का उल्लंघन मानी जाती है, ऐसे में प्रशासन की सक्रियता को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं।
‘केसर’ पान मसाला में सबसे अधिक वृद्धि
जनपद में विशेष रूप से केसर पान मसाला के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी बताई जा रही है। जो पैकेट पूर्व में लगभग ₹150 में उपलब्ध था, वह थोक स्तर पर ₹220 तक पहुंचने की बात कही जा रही है। खुदरा दुकानदारों का कहना है कि बढ़ी हुई लागत के चलते वे ₹10 में पहले की तुलना में कम पाउच दे पा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।

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